बिहार का प्लंबर बोला- मेरे अकाउंट में ₹294 करोड़, सबने पकड़ लिया माथा; फिर पुलिस ने बताई पूरी सच्चाई
बोधगया के एक प्लंबर विकास रविदास के बैंक खाते में अचानक 294 करोड़ 80 लाख रुपये दिखने से हड़कंप मच ...और पढ़ें

प्लंबर के खाते में आए 294 करोड़ रुपये आने का दावा फर्जी निकला। फोटो- जागरण

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संवाद सूत्र, बोधगया। एक साधारण प्लंबर और इलेक्ट्रिकल मिस्त्री के बैंक खाते में अचानक 294 करोड़ 80 लाख रुपये की राशि दिखाई देने का मामला शुक्रवार को पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, पुलिस की जांच में यह सूचना फर्जी और भ्रामक निकली।
जानकारी के अनुसार, पुलिस की जांच में कई तथ्य सामने आए हैं। हालांकि, इससे पहले पूरा मामला जान लीजिए। दरअसल, बोधगया थाना क्षेत्र के मस्तपुरा गांव निवासी विकास रविदास के खाते में अरबों रुपये का बैलेंस दिखने की खबर आग की तरह फैल गई थी। इसके बाद यह मामला पूरे इलाके में कौतूहल का विषय बन गया।
पेशे से इलेक्ट्रिकल एवं प्लंबर मिस्त्री होने के साथ-साथ सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर विकास का दावा था कि गुरुवार रात जियो फाइनेंस एप के माध्यम से अपने जियो पेमेंट्स बैंक खाते का बैलेंस चेक किया।
स्क्रीन पर 2,94,80,00,000 रुपये की राशि देखकर वह स्तब्ध रह गया। शुरुआत में उसने इसे कोई तकनीकी गड़बड़ी समझा, लेकिन अलग-अलग तरीकों से दोबारा बैलेंस जांचने पर भी वही राशि दिखाई दी।

विकास ने दावा करते हुए यह भी बताया कि उसके खाते में अब तक अधिकतम छह से सात लाख रुपये तक का ही लेन-देन हुआ है।
ऐसे में अचानक करोड़ों रुपये की राशि दिखना उसके लिए किसी सपने जैसा था। संभावित कानूनी और बैंकिंग जटिलताओं को देखते हुए उसने खाते से कोई भी राशि निकालने का प्रयास नहीं किया।
गांव में लगा जमावड़ा
घटना की जानकारी मिलते ही विकास के घर पर लोगों का तांता लग गया। गांव से लेकर आसपास के क्षेत्रों तक हर कोई इसी अनोखी घटना की चर्चा कर रहा था। कोई इसे तकनीकी खामी बता रहा था, तो कोई इसके पीछे किसी बड़ी वित्तीय गड़बड़ी की आशंका जता रहा था।
इधर, मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर थाना गया के एसडीपीओ सह थानाध्यक्ष ए.आर. दानिश ने जांच शुरू की। उन्होंने बताया कि घटना की सूचना मुख्यालय को भेज दी गई है।
उन्होंने कहा कि जियो पेमेंट्स बैंक पूरी तरह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर संचालित होता है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। विकास रविदास को पूछताछ के लिए साइबर थाने में भी बुलाया गया।
पुलिस की जांच में सामने आया पूरा सच
एसडीपीओ ने बताया कि इस मामले में तकनीकी जांच में साइबर थाना की मदद ली गई। उन्होंने बताया कि लिखित आवेदन के आधार पर जब जांच की गई तो खाते में करोड़ों रुपये आने की बात असत्य, भ्रामक और निराधार निकली।
पुलिस की ओर से जियो पेमेंट्स बैंक के खाते का सत्यापन किया गया। इस क्रम में यह सच सामने आया कि उक्त खाते से ऐसा कोई भी लेन-देन नहीं हुआ है। वहीं, विकास रविदास के बैंक खाते में महज 429.84 रुपये उपलब्ध थे।

पुलिस ने विकास के खाते में 294 करोड़ रुपये आने की बात को असत्य और भ्रामक बताते हुए सूचना का खंडन किया है। इस संबंध में पुलिस की ओर से विज्ञप्ति भी जारी की गई है।
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