मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना: महिलाओं को 20 हजार की दूसरी किस्त के लिए पूरी करनी होंगी ये शर्तें
गया में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार के लिए वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दूसरी किस्त के 20 हजार रुपये पाने ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के लिए कार्यक्रम। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का अभिमुखीकरण कार्यक्रम गया में।
दूसरी किस्त के 20 हजार रुपये हेतु शर्तें निर्धारित।
वित्तीय साक्षरता, बचत, SHG भागीदारी अनिवार्य।
जागरण संवाददाता, गयाजी। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और महिला लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए वित्तीय रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से सोमवार को कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जिला परियोजना समन्वय इकाई में परियोजना कर्मियों के एक दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्राम संगठन स्तर पर दिए जाने वाले वित्तीय साक्षरता एवं लेखांकन प्रशिक्षण की तैयारी करना था।
ताकि योजना से जुड़ी प्रत्येक महिला लाभार्थी को व्यवसाय संचालन और वित्तीय प्रबंधन की व्यवहारिक जानकारी मिल सके।
प्रशिक्षण का संचालन पीपीटी के माध्यम से मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के नोडल अनुपम जान एवं कुंदन लाल साह ने किया।
वित्तीय साक्षरता और लेखांकन जरूरी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला परियोजना प्रबंधक आचार्य मम्मट ने कहा कि योजना का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब प्रत्येक ग्राम संगठन तक गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पहुंचे।
उन्होंने कहा कि वित्तीय साक्षरता और लेखांकन किसी भी छोटे या बड़े उद्यम की सफलता की आधारशिला है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र लाभार्थी इस प्रशिक्षण से वंचित न रहे।
इस अवसर पर योजना के नोडल अनुपम जान ने बताया कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में 10 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाती है।
दूसरी किस्त में मिलेंगे 20 हजार रुपये
इसके बाद स्वरोजगार गतिविधियों के सत्यापन और निर्धारित मानकों के मूल्यांकन के उपरांत पात्र लाभार्थियों को दूसरी किस्त के रूप में 20 हजार रुपये सीधे डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में हस्तांतरित किए जाएंगे।
दूसरी किस्त प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों को वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षण पूरा करना, स्वयं सहायता समूह की बैठकों में नियमित भागीदारी जरूरी है।
इसके अलावा लगातार तीन माह तक बचत करना, व्यवसायिक योजना तैयार करना, ग्राम संगठन से अनुमोदन प्राप्त करना, आय-व्यय पंजी का नियमित संधारण करना तथा स्वयं सहायता समूह से लिए गए ऋण का समय पर भुगतान जैसे मानकों को पूरा करना होगा। इन सभी बिंदुओं के आधार पर लाभार्थियों की पात्रता का आकलन किया जाएगा।