35 वर्षों की तपस्या से पहाड़ काटकर बनाई 5 किमी लंबी नहर, अब 'कैनाल मैन' लौंगी भुइयां के सपनों को बिहार में पंख देगी CWS NGO
लौंगी भुइयां ने 35 वर्षों में 5 किमी नहर बनाकर 'कैनाल मैन' की पहचान बनाई। अब सीडब्ल्यूएस संस्था उनके जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के सपनों को साकार कर ...और पढ़ें

पहाड़ काटकर बनाई पांच किलोमीटर लंबी नहर
HighLights
लौंगी भुइयां ने 35 वर्षों में 5 किमी लंबी नहर बनाई।
CWS संस्था 'कैनाल मैन' के जल संरक्षण सपनों को पूरा करेगी।
संस्था ने हरित भूमि अभियान और सामूहिक वृक्षारोपण शुरू किया।
संवाद सूत्र, बांकेबाजार (गया)। जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर नक्सल प्रभावित लुटुआ पंचायत के कोठिलवा गांव के 75 वर्षीय लौंगी भुइयां आज पूरी दुनिया में 'कैनाल मैन' के नाम से जाने जाते हैं।
यह पहचान उन्हें विरासत में नहीं मिली, बल्कि तीन दशक से अधिक समय तक किए गए कठिन परिश्रम, दृढ़ संकल्प और जल संरक्षण के प्रति समर्पण से मिली है।
अब उनके अधूरे सपनों को साकार करने का जिम्मा सिकंदराबाद (तेलंगाना) की सामाजिक संस्था सीडब्ल्यूएस (सेंटर फॉर वर्ल्ड सॉलिडेरिटी) ने उठाया है।
संस्था ने क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा, पोषण और कृषि सिंचाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्य शुरू कर दिया है।
सर्वे पूरा, हरित भूमि अभियान की शुरुआत
सीडब्ल्यूएस के इंजीनियर शंकर दा एवं उनकी टीम ने लौंगी भुइयां की कार्ययोजनाओं का सर्वेक्षण पूरा कर लिया है।
संस्था की ओर से चलाए जा रहे हरित भूमि कार्यक्रम के तहत सामूहिक वृक्षारोपण के साथ अभियान की शुरुआत की जा रही है।
इस अभियान में सीडब्ल्यूएस के निदेशक मनमय सिंह, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी तुलिका मुखर्जी, प्रखंड समन्वयक रामलखन प्रसाद तथा समाजसेवी राधेश्याम ठाकुर, सोनम कुमारी, समता कुमारी और बिमला कुमारी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
पहाड़ काटकर बनाई पांच किलोमीटर लंबी नहर
कोठिलवा गांव घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा क्षेत्र है, जहां वर्षों तक बारिश का पानी व्यर्थ बह जाता था और किसान सिंचाई के लिए परेशान रहते थे। रोजगार के अभाव में गांव के युवा पलायन करने को मजबूर थे।
ऐसे समय में लौंगी भुइयां ने अकेले ही कुल्हाड़ी और फावड़े के सहारे पहाड़ों और चट्टानों को काटना शुरू किया।
शुरुआती दिनों में लोगों ने उन्हें पागल तक कहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार 35 वर्षों की मेहनत के बाद उन्होंने पांच किलोमीटर लंबी नहर तैयार कर दी, जिससे आसपास के गांवों में सिंचाई और भू-जल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
75 वर्ष की उम्र में भी नहीं थमा जज्बा
लौंगी भुइयां का संघर्ष पहली नहर बनने के बाद भी नहीं रुका। 75 वर्ष की उम्र पार करने के बावजूद वे आज भी जल संरक्षण के नए प्रयासों में जुटे हैं।
उन्होंने खजुराहा जंगल क्षेत्र में वर्षा जल संचयन के लिए नए तालाबों की खुदाई शुरू कर दी है। उनका सपना है कि क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों और पशुओं को पूरे वर्ष पानी की सुविधा उपलब्ध हो सके।
सर्वेक्षण के दौरान इंजीनियर शंकर दा ने भी उनके कार्यों की सराहना की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
सीडब्ल्यूएस बनेगा सपनों का साथी
सीडब्ल्यूएस संस्था लौंगी भुइयां के जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में कार्य कर रही है।
संस्था का मानना है कि ऐसे प्रयास ग्रामीण विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरणास्रोत बन सकते हैं।
संस्था के सहयोग से स्थानीय लोगों, प्रशासन और समाज का ध्यान इस दिशा में आकर्षित हो रहा है, जिससे भविष्य में क्षेत्र के विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने 'कैनाल मैन'
लौंगी भुइयां ने अपने संघर्ष से यह साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति और समर्पण के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।
उनका जीवन संदेश देता है कि एक व्यक्ति का संकल्प पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है।
आज कोठिलवा के 'कैनाल मैन' केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास की जीवंत मिसाल बन चुके हैं।
सीडब्ल्यूएस का सहयोग उनके सपनों को नई उड़ान देने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।