गया में मूसलधार बारिश में भरभराकर गिरा खपरैल मकान, छह घंटे तक मलबे में दबे रहे वृद्ध, देखते ही रोने लगे घरवाले
गुरुआ के मटुआ गांव में भारी बारिश के कारण एक खपरैल मकान ढह गया, जिसमें सो रहे वृद्ध किशुन मांझी ...और पढ़ें

जिंदा मिले किशुन मांझी
HighLights
गुरुआ में भारी बारिश से खपरैल मकान ढहा।
वृद्ध किशुन मांझी छह घंटे मलबे में दबे रहे।
ग्रामीणों ने उन्हें जीवित निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
संवाद सूत्र, गुरुआ (गया)। प्रखंड क्षेत्र के मटुआ गांव में बुधवार की देर रात मूसलाधार बारिश के बीच एक खपरैल मकान अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे के समय मकान के अंदर सो रहे वृद्ध किशुन मांझी मलबे में दब गए। रात का समय होने के कारण आसपास के लोगों को घटना की तत्काल जानकारी नहीं हो सकी।
करीब छह घंटे तक वृद्ध मलबे के नीचे दबे रहे। सुबह ग्रामीणों की नजर गिरे हुए मकान पर पड़ी तो उन्हें अनहोनी की आशंका हुई।
मलबा हटाते ही दिखी उम्मीद, जिंदा मिले किशुन मांझी
ग्रामीणों ने बिना देर किए मलबा हटाने का काम शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद वृद्ध को मलबे से बाहर निकाला गया। राहत की बात रही कि करीब छह घंटे तक मलबे में दबे रहने के बावजूद उनकी सांसें चल रही थीं।
ग्रामीण आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है। चिकित्सकों ने वृद्ध की हालत चिंताजनक बताई है।
रात करीब 12 बजे ढहा मकान, बारिश बनी हादसे की वजह
बताया जाता है कि घटना रात करीब 12 बजे की है। किशुन मांझी अपने खपरैल मकान में सो रहे थे। इसी दौरान लगातार हो रही बारिश के बीच अचानक मकान ढह गया।
मकान का मलबा सीधे वृद्ध के ऊपर जा गिरा और वह उसके नीचे दब गए। रात का समय और तेज बारिश होने के कारण किसी को घटना की भनक नहीं लगी। सुबह तक वृद्ध उसी स्थिति में मलबे के नीचे फंसे रहे।
समय पर ग्रामीण नहीं पहुंचते तो मुश्किल थी जान बचाना
सुबह मकान पूरी तरह गिरा देखकर ग्रामीणों को किसी के अंदर दबे होने का अंदेशा हुआ। इसके बाद ग्रामीणों ने एकजुट होकर मलबा हटाना शुरू किया।
काफी प्रयास के बाद किशुन मांझी को बाहर निकाला जा सका। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सुबह समय रहते मलबा नहीं हटाया जाता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। वृद्ध को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
जर्जर खपरैल मकानों को लेकर बढ़ी ग्रामीणों की चिंता
घटना के बाद मटुआ गांव में दहशत का माहौल है। लगातार हो रही बारिश के बीच जर्जर और खपरैल मकानों में रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान ऐसे मकानों के गिरने का खतरा बना रहता है। हादसे ने ग्रामीण इलाकों में कमजोर मकानों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
