'कम पानी में भी खेती संभव', गया में किसानों ने सीखे श्रीअन्न के गुर; वैज्ञानिक विधि से बढ़ेगी किसानों की आय
नवादा के किसानों ने गया के मायापुर स्थित बिहार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में श्रीअन्न की उन्नत खेती, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन की तकनीक सीखी।

गया में किसानों ने सीखे श्रीअन्न के गुर
HighLights
नवादा के किसानों ने गया में मिलेट्स खेती का प्रशिक्षण लिया।
कम पानी में भी श्रीअन्न की खेती संभव, विशेषज्ञों ने बताया।
प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन से किसानों की आय बढ़ेगी।
संवाद सूत्र, फतेहपुर (गया)। कृषि विभाग नवादा से जुड़े किसानों के दल गया जिले के टनकुप्पा प्रखंड के मायापुर स्थित बिहार सेंटर आफ एक्सीलेंस फार मिलेट्स वैल्यू चेन का भ्रमण किया। यहां किसानों को श्रीअन्न की उन्नत खेती, फसल प्रबंधन, बीज उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन की तकनीक की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के बाद किसानों ने केंद्र के प्रदर्शन क्षेत्र में मिलेट्स की फसलों का अवलोकन कर खेती की व्यावहारिक जानकारी हासिल की।
कम पानी में भी खेती की संभावना
इक्रीसैट के विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि बाजरा, रागी, ज्वार, कंगनी, कुटकी, कोदो, सांवा और चेना प्रमुख मिलेट्स फसलें हैं। इनमें कई फसलें अपेक्षाकृत कम पानी और कम अवधि में तैयार हो सकती हैं।
बदलते मौसम तथा अनियमित वर्षा की स्थिति में फसल विविधीकरण के लिए मिलेट्स उपयोगी विकल्प हो सकते हैं। हालांकि उत्पादन मिट्टी, किस्म, मौसम और कृषि प्रबंधन पर निर्भर करता है।
बीज उत्पादन और फसल प्रबंधन का प्रशिक्षण
किसानों को खेत की तैयारी, उपयुक्त किस्म का चयन, बुआई, बीज की मात्रा, खरपतवार नियंत्रण और पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी दी गई। गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन के लिए खेत का चयन, फसल की शुद्धता बनाए रखना, अवांछित पौधों को हटाना, कटाई, सफाई और सुरक्षित भंडारण की प्रक्रिया भी समझाई गई।
उत्पादन के साथ मूल्यवर्धन पर जोर
इक्रीसैट के विशेषज्ञों ने बताया कि मिलेट्स की सफाई, ग्रेडिंग, मिलिंग और पैकेजिंग के साथ रोटी, दलिया, खिचड़ी, लड्डू, बिस्कुट आदि उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इससे कृषि उत्पाद का मूल्य बढ़ाने के साथ किसानों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर विकसित हो सकते हैं। किसानों ने खेत में प्रसंस्करण की प्रक्रियाओं को भी नजदीक से देखा।
पोषक तत्वों से भरपूर श्रीअन्न
मिलेट्स में आहार फाइबर, प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। रागी कैल्शियम के प्रमुख स्रोतों में शामिल है। जबकि बाजरा भी पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण अनाज है। भ्रमण के दौरान इक्रीसैट की टीम ने किसानों के सवालों का जवाब देते हुए तकनीकी मार्गदर्शन दिया।
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