गया में पारंपरिक खेती छोड़ चंदन पर किया निवेश, धैर्य से मिलेगा लाखों का रिटर्न
टिकारी के उर गांव के किसान राजू कुमार ने पारंपरिक खेती छोड़ तीन साल पहले 50 सफेद चंदन के पौधे लगाए। यह अनोखी पहल उन्हें भविष्य में लाखों की कमाई की उम ...और पढ़ें

चंदन के खेत में राजू कुमार। फोटो जागरण
HighLights
किसान राजू कुमार ने 50 सफेद चंदन के पौधे लगाए।
पारंपरिक खेती छोड़ लाखों की कमाई की उम्मीद।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बने राजू।
संवाद सहयोगी, टिकारी। खेती में नई तकनीक और वैकल्पिक फसलों को अपनाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। टिकारी प्रखंड के उर गांव निवासी किसान राजू कुमार भी अपनी एक अनोखी पहल से आज पूरे क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
उन्होंने करीब तीन वर्ष पूर्व अपने खेत में 50 सफेद चंदन के पौधे लगाए थे, जो अब तेजी से विकसित हो रहे हैं। आने वाले वर्षों में इन्हीं पौधों से लाखों रुपये की आय होने की उम्मीद है।
जोखिम भरा फैसला, पर नहीं मानी हार
युवा किसान राजू कुमार ने बताया कि पारंपरिक खेती के साथ कुछ अलग और अधिक लाभकारी करने की सोच ने उन्हें चंदन की खेती की ओर प्रेरित किया था। शुरुआत में जब उन्होंने यह कदम उठाया, तो स्थानीय लोगों ने इसे एक बेहद जोखिम भरा निर्णय बताया और हतोत्साहित किया, लेकिन राजू ने हार नहीं मानी। उनकी लगातार देखभाल और कड़ी मेहनत का ही परिणाम है कि आज सभी पौधे पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में आगे बढ़ रहे हैं।
चंदन की खेती में 'धैर्य' है सबसे बड़ी पूंजी
राजू के अनुसार, चंदन की खेती में धैर्य सबसे बड़ी पूंजी है क्योंकि इसे तैयार होने में समय लगता है। इन पौधों की नियमित सिंचाई, सुरक्षा और समय-समय पर विशेष देखभाल की जाती है।
चूंकि चंदन एक परजीवी प्रकृति का पौधा है। इसलिए इसकी बेहतर वृद्धि और पोषण के लिए इसके साथ सहायक पौधे भी लगाए गए हैं, जिससे इसकी ग्रोथ काफी अच्छी हो रही है।
क्या कहते हैं किसान राजू कुमार
मैं चाहता था कि पारंपरिक खेती के साथ कुछ ऐसा करूं, जिससे भविष्य में अच्छी आमदनी हो और दूसरे किसानों को भी नई राह मिले। इसी सोच के साथ तीन वर्ष पहले मुरादाबाद से लाकर सफेद चंदन के 50 पौधे लगाए थे।
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अब इनकी अच्छी बढ़वार देखकर खुशी होती है। यदि किसान सही जानकारी और तकनीक के साथ इसकी खेती करें तो यह आने वाले वर्षों में आय का बड़ा स्रोत बन सकती है।
दीर्घकालिक निवेश के रूप में कृषि विशेषज्ञों की पसंद
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सफेद चंदन की लकड़ी, तेल और इससे बनने वाले अन्य उत्पादों की देश के साथ-साथ विदेशों में भी भारी मांग रहती है। युवा प्रगतिशील किसान इं. आशीष कुमार कहते हैं इसकी खेती में समय जरूर लगता है, लेकिन परिपक्व होने पर इसकी कीमत सामान्य वृक्षों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। यही वजह है कि अब प्रगतिशील किसान इसे एक सुरक्षित और बड़े दीर्घकालिक निवेश के रूप में अपना रहे हैं।
अन्य किसानों के लिए बन रहे प्रेरणा स्रोत
उर गांव में राजू कुमार की यह पहल अब आसपास के इलाकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। वे अन्य किसानों के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरे हैं। आस-पास के गांवों के कई किसान लगातार उनके खेत पर पहुंचकर चंदन की खेती की बारीकियों और तकनीक की जानकारी ले रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह के नवाचार से न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि खेती के प्रति युवाओं का रुझान भी दोबारा बढ़ेगा।
सरकारी मार्गदर्शन मिले तो बदल सकती है ग्रामीण अर्थव्यवस्था
राजू कुमार का स्पष्ट कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर किसानों को सरकार की ओर से सही तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और थोड़ा प्रोत्साहन मिले, तो चंदन की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है।
उन्होंने उम्मीद जताई है कि यदि यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहता है, तो आने वाले समय में टिकारी क्षेत्र पूरे सूबे में चंदन की खेती के लिए अपनी एक नई और विशिष्ट पहचान बना सकता है। भविष्य की योजनाओं को लेकर राजू ने बताया कि वे जल्द ही अपने खेत में चंदन के पौधों की संख्या को और बढ़ाने जा रहे हैं।