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गया के किसानों ने अमेरिकी एक्सपर्ट की मदद से बदली तकदीर, ग्रुप बनाकर व्यवसायिक खेती से हो रही बंपर कमाई  

Published: Mon, 07 Sep 2026 09:33 AM (GMT+05:30)

गया के शेरघाटी प्रखंड के किसानों ने पारंपरिक खेती छोड़कर सामूहिक और व्यावसायिक केले की खेती अपनाई है। अमेरिकी विशेषज्ञों ...और पढ़ें

किसानों का ग्रुप। फोटो जागरण

किसानों का ग्रुप। फोटो जागरण

HighLights

  1. किसानों ने पारंपरिक खेती छोड़ व्यावसायिक केले की खेती अपनाई।

  2. अमेरिकी विशेषज्ञों और 'प्राण' संस्था ने दिया सहयोग।

  3. सौर ऊर्जा और ड्रिप सिंचाई से मुनाफा बढ़ा।

संवाद सहयोगी, शेरघाटी (गया)। शेरघाटी प्रखंड क्षेत्र के किसान अब पारंपरिक कृषि पद्धतियों से अलग हटकर सामूहिक और व्यावसायिक खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।

हालांकि, शुरुआत में किसानों को कई तरह की समस्याओं और ताने-बाने का सामना करना पड़ा, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर आधा दर्जन किसानों ने मिलकर सफलता की नई इबारत लिख दी है।

मुश्किलों में शुरू किया सामूहिक प्रयास

स्थानीय किसान विनोद प्रसाद, राम रतन प्रसाद, अजीत कुमार उर्फ पप्पू प्रसाद, रविंद्र प्रसाद, रूप राम और सुदामा प्रसाद ने बताया कि शुरुआत में खेती का जोखिम उठाना आसान नहीं था।

संस्था के साथ बैठक के दौरान पहले 50 प्रतिशत, फिर 25 प्रतिशत किसान अलग हो गए। अंत में सिर्फ छह किसानों ने मिलकर राशि जमा की और समूह का गठन किया।

शुरुआत में जब काम में देरी हुई तो गांव के लोग तंज कसने लगे, लेकिन किसानों ने हिम्मत नहीं हारी। दो माह बाद जब बोरवेल और तालाब निर्माण का काम युद्धस्तर पर शुरू हुआ, तो विरोध करने वाले लोग भी अब समूह से जुड़ने को बेताब हैं।

संस्था के सहयोग से केले की खेती से बढ़ा मुनाफा

स्वयंसेवी संस्था 'प्राण' के अधिकारी डी.के. सिंह की प्रेरणा और अमेरिका से आए कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में किसानों ने केले की व्यावसायिक खेती शुरू की।

किसानों के अनुसार, एक घौंद (कांधी) से औसतन 30 किलो उपज मिल रही है, जो स्थानीय बाजार में 20 रुपये प्रति किलो के थोक भाव से बिक रही है। इसमें किसानों को लागत का लगभग 50 प्रतिशत तक मुनाफा हो रहा है।

सौर ऊर्जा से मिली बिजली-पानी की समस्या से मुक्ति

संस्था के माध्यम से किसानों को दो बोरवेल, तालाब और कृषि उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही 4 सिंचाई पंप के लिए  सोलर प्लांट लगाया गया है, जिससे सिंचाई के साथ-साथ आटा चक्की और थ्रेशर भी आसानी से चलाए जा रहे हैं।

सिंचाई के लिए आधुनिक 'ड्रिप' और स्प्रिंकलर (ड्रॉपर) विधि का प्रयोग किया जा रहा है। पानी के उपयोग का सटीक हिसाब रखने के लिए बकायदा वॉटर मीटर लगाया गया है।

आपसी बचत से आपातकालीन वित्तीय मदद

किसान समूह के प्रत्येक सदस्य ने 27,500 रुपये का अंशदान जमा कर स्थानीय पंजाब नेशनल बैंक में खाता खुलवाया है। इस जमा पूंजी का उपयोग समूह के सदस्य जरूरत पड़ने पर मात्र एक प्रतिशत ब्याज पर ऋण के रूप में करते हैं।

प्रशिक्षण से बदला खेती का ढांचा

किसानों को उन्नत कृषि का प्रशिक्षण देने के लिए बीएचयू (BHU), बेगूसराय और अन्य प्रमुख कृषि अनुसंधान केंद्रों का भ्रमण कराया गया। इसके अलावा, वज्रपात से सोलर प्लांट की सुरक्षा के लिए तड़ित चालक (Lightning Arrester) भी स्थापित किया गया है। किसान अब धान, रबी और मूंग की पारंपरिक फसलों के साथ-साथ व्यावसायिक खेती कर आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे हैं।

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