जिसे अस्पताल ने समझा 'लावारिस', वो निकला दिल के सबसे करीब; गया में लापता पिता से मिलकर छलके बेटे के आंसू
सात महीने से लापता 56 वर्षीय नंद किशोर प्रसाद गया के मगध मेडिकल कॉलेज के लावारिस वार्ड में अपने परिवार से मिल गए। मानसिक रूप से अस्वस्थ नंद किशोर को स ...और पढ़ें

गया में सात महीने बाद अस्पताल में मिले लापता पिता, परिवार से हुआ भावुक मिलन
HighLights
सात महीने से लापता नंद किशोर प्रसाद मगध मेडिकल कॉलेज में मिले।
मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण लावारिस वार्ड में भर्ती थे।
बेटे अर्जुन कुमार ने पिता को पहचानकर भावुक होकर गले लगाया।
जागरण संवाददाता, गयाजी। मानपुर के वार्ड संख्या-49 स्थित शिवचरण लेन मोहल्ले में बुधवार को भावनाओं से भरा एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। करीब सात महीने से लापता 56 वर्षीय नंद किशोर प्रसाद आखिरकार अपने परिवार से मिल गए।
उनकी घर वापसी से पूरे परिवार में खुशी और राहत का माहौल है। नंद किशोर प्रसाद के पुत्र अर्जुन कुमार ने बताया कि उनके पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ थे। पिछले वर्ष 23 दिसंबर को वे अचानक घर से निकल गए थे और फिर उनका कोई पता नहीं चला।
इसी दौरान किसी सड़क दुर्घटना में घायल होने पर स्थानीय लोगों ने उन्हें अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल में भर्ती करा दिया। पहचान नहीं होने के कारण अस्पताल प्रशासन ने उन्हें लावारिस मरीज के रूप में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया।
इधर, परिवार के लोग उन्हें तलाशने के लिए लगातार भटकते रहे। मानपुर, खिजरसराय, अतरी, वजीरगंज समेत जिले के कई प्रखंडों और शहर के विभिन्न इलाकों में खोजबीन की गई, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। समय बीतने के साथ उम्मीदें भी धुंधली पड़ने लगी थीं।
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इसी बीच मोहल्ले के कुछ लोगों ने परिवार को सलाह दी कि एक बार मगध मेडिकल कॉलेज के लावारिस वार्ड में जाकर भी तलाश करें। इस सुझाव पर जब स्वजन अस्पताल पहुंचे और वार्ड में खोजबीन शुरू की तो एक बेड पर लेटे व्यक्ति पर उनकी नजर ठहर गई।
पास जाकर देखा तो वह नंद किशोर प्रसाद ही थे। सात महीने बाद पिता को सामने देखकर बेटे अर्जुन कुमार की आंखों से आंसू छलक पड़े। परिवार के अन्य सदस्य भी भावुक हो उठे। इसके बाद उन्होंने अस्पताल अधीक्षक डा. ए.पी. आनंद से पूरी जानकारी साझा की।
आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने नंद किशोर प्रसाद को उनके स्वजनों के सुपुर्द कर दिया। सात महीने बाद बिछड़े पिता के मिलने से परिवार में फिर से खुशियां लौट आई हैं। स्वजन इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं।