दिन में हादसों का डर; रात में जंगल का खौफ... दिल्ली-कोलकाता NH-19 पर ये 28 KM सड़क क्यों खतरनाक?
दिल्ली-कोलकाता NH-19 पर गया जिले का 28 किलोमीटर का हिस्सा सड़क सुरक्षा और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। इस मार्ग पर ब्लैक ...और पढ़ें

बाराचट्टी में 71 माइल के निकट दिल्ली - कोलकाता नेशनल हाईवे 19। जागरण
HighLights
NH-19 का 28 किमी हिस्सा सड़क सुरक्षा, कानून-व्यवस्था पर चिंता।
12 किमी सुनसान जंगल अपराधियों का ठिकाना, मिले लावारिस शव।
ब्लैक स्पॉट, सुरक्षा इंतजामों की कमी से बढ़ रहे हादसे, अपराध।
संवाद सूत्र, बाराचट्टी (गया)। दिल्ली-कोलकाता नेशनल हाईवे-19 पर गया जिले के बाराचट्टी थाना क्षेत्र से गुजरने वाला करीब 28 किलोमीटर का हिस्सा सड़क सुरक्षा और कानून-व्यवस्था, दोनों लिहाज से गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
इस मार्ग पर एक ओर कई ब्लैक स्पॉट लगातार सड़क हादसों को न्योता दे रहे हैं, तो दूसरी ओर जयगीर मोड़ से भलुआ चट्टी तक लगभग 12 किलोमीटर लंबा सुनसान जंगल अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है।
यहां पूर्व में कई बार लावारिस शव और नरकंकाल बरामद हो चुके हैं, जिनमें अधिकांश मामलों का अब तक खुलासा नहीं हो पाया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर सुरक्षा इंतजामों की कमी और जंगल क्षेत्र में पर्याप्त निगरानी नहीं होने के कारण यहां हर समय दुर्घटना और आपराधिक घटनाओं का खतरा बना रहता है।
कई ब्लैक स्पॉट बने दुर्घटना के कारण
हाईवे के सबसे संवेदनशील स्थानों में भलुआ का बड़ा कट, 71 माइल कट का तीखा मोड़, जयगीर मोड़, बुमेर मोड़ से गजरागढ़ तक का रांग साइड क्षेत्र, ब्लाक मोड़ के समीप अंडरपास, सुलेबटा अंडरपास और सोभ मिनी अंडरपास शामिल हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार कई स्थानों पर सर्विस लेन में स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए गए हैं। वहीं डिवाइडर पर लगे घने पौधों के कारण सामने से आने वाले वाहनों का दृश्य स्पष्ट नहीं दिखता, जिससे अचानक वाहन सामने आने पर हादसे की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
रेलिंग और क्रैश बैरियर नहीं, मनमाने तरीके से कट बना रहे चालक
ब्लाक मोड़ के पास एनएचएआई की ओर से सुरक्षा रेलिंग नहीं लगाए जाने के कारण वाहन चालक सीधे हाईवे से ही वाहन मोड़ देते हैं।
इसी तरह काहुदाग-गजरागढ़ बाजार मोड़ पर क्रैश बैरियर नहीं होने से लोग अपनी सुविधा के अनुसार कहीं से भी कट बनाकर रांग साइड में प्रवेश कर जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लापरवाही आए दिन दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रही है।
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जंगल में कई बार मिले शव, नहीं खुले अधिकांश मामले
जयगीर मोड़ से भलुआ चट्टी तक फैला जंगल दिन और रात दोनों समय अपेक्षाकृत सुनसान रहता है। ग्रामीणों के मुताबिक अपराधी कई बार हत्या के बाद शव झाड़ियों में फेंककर फरार हो जाते हैं।
इसके अलावा पशु तस्कर मरे हुए मवेशियों को भी सड़क किनारे छोड़ देते हैं, जिससे क्षेत्र में अक्सर दुर्गंध फैली रहती है।ग्रामीणों का कहना है कि कई बार इसी बदबू के बीच मानव शव भी कई दिनों तक पड़े रहते हैं।
जंगल में लकड़ी चुनने या मवेशी चराने गए लोगों की नजर पड़ने के बाद ही पुलिस को सूचना मिलती है। पुलिस कानूनी प्रक्रिया पूरी करती है, लेकिन कई मामलों में न तो शवों की पहचान हो पाती है और न ही घटना का खुलासा।
स्थानीय लोगों ने उठाई सुरक्षा बढ़ाने की मांग
बरवाडीह गांव के लालदेव यादव ने कहा कि ब्लैक स्पॉट पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से प्रतिदिन लोगों की जान जोखिम में रहती है।
जयगीर पंचायत के पूर्व मुखिया बालेश्वर यादव ने कहा कि जयगीर से भलुआ चट्टी तक सीसीटीवी कैमरे, हाईमास्ट लाइट और नियमित पुलिस गश्त की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि अपराध और दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हो सके।
प्रमुख प्रतिनिधि जगदीश यादव ने कहा कि ब्लाक मोड़ पर सुरक्षा रेलिंग तथा काहुदाग मोड़ पर क्रैश बैरियर नहीं होने से लोग मनमाने ढंग से वाहन मोड़ते हैं, जिससे लगातार हादसे हो रहे हैं।
प्रशासन और एनएचएआई से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने एनएचएआई और जिला प्रशासन से सभी ब्लैक स्पॉट का तकनीकी सर्वे कराने, सुरक्षा रेलिंग, क्रैश बैरियर, स्पीड ब्रेकर, चेतावनी संकेतक, सीसीटीवी कैमरे और हाईमास्ट लाइट लगाने के साथ हाईवे पेट्रोलिंग बढ़ाने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो एनएच-19 का यह हिस्सा आगे भी सड़क हादसों और रहस्यमयी आपराधिक घटनाओं का केंद्र बना रहेगा।