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3516 करोड़ से बदल जाएगा विष्णुपद मंदिर का पूरा क्षेत्र, बनेंगे एलिवेटेड पथ, मल्टीलेवल पार्किंग और नए घाट

Published: Wed, 16 Sep 2026 08:36 AM (IST)

बिहार सरकार ने गयाजी के विष्णुपद मंदिर और सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना के लिए कुल ₹3,516.05 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति ...और पढ़ें

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर बदलेगा विष्णुपद मंदिर। फाइल

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर बदलेगा विष्णुपद मंदिर। फाइल

HighLights

  1. विष्णुपद मंदिर और सोन-फल्गु योजना को ₹3,516 करोड़ स्वीकृत।

  2. मंदिर परिसर का काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकास होगा।

  3. श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

जागरण संवाददाता, गयाजी। विश्वप्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर एवं आसपास के क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में बिहार सरकार ने बड़ी पहल की है।

पर्यटन विभाग द्वारा विष्णुपद मंदिर परिसर के विकास के लिए ₹2,520 करोड़ तथा सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना के निर्माण कार्य के लिए ₹996.05 करोड़, कुल ₹3,516.05 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

बिहार विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. प्रेम कुमार ने इस महत्वपूर्ण निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि विष्णुपद मंदिर गया की ऐतिहासिक, पौराणिक एवं धार्मिक पहचान का केंद्र है।

विस अध्‍यक्ष बोले-मंद‍िर क्षेत्र का होगा सर्वांगीण व‍िकास 

यहां पितृपक्ष मेला के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं तथा पूरे वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं का आगमन होता है।

इतनी बड़ी राशि की स्वीकृति से विष्णुपद मंदिर क्षेत्र का आधुनिक सुविधाओं से युक्त समग्र विकास संभव होगा। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ काॅरिडोर की तर्ज पर विष्णुपद मंदिर परिसर का विकास किया जाएगा।

इसके तहत मंदिर परिसर का विकास, मल्टीलेवल कार पार्किंग-1 एवं 2, एलिवेटेड पथ, मनसरवा-मानपुर ब्रिज, रैंप, घाटों का विकास, डोरमेटरी एवं कैंटीन, पैदल यात्री पुल, प्रतिमा निर्माण, पीएफसी सीता कुंड, सार्वजनिक एवं आंतरिक सुविधाओं सहित निर्माण-पूर्व गतिविधियों एवं अन्य सहायक कार्य किए जाने प्रस्तावित हैं।

योजना का क्रियान्वयन बिहार राज्य पथ विकास निगम लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। अध्यक्ष ने कहा कि सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना के तहत इन्द्रपुरी बैराज से लगभग 23 किलोमीटर अपस्ट्रीम में एक इनटेक वेल का निर्माण प्रस्तावित है।

11 क‍िलोमीटर पाइपलाइन से जाएगा सोन का पानी 

इसके माध्यम से सोन नदी से आवश्यक मात्रा में जल उठाकर लगभग 11 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए उत्तर कोयल मुख्य नहर के लगभग 32.77 किलोमीटर बिंदु पर जल प्रवाहित किया जाएगा।

इसके बाद सोन नदी का पानी उत्तर कोयल दायां मुख्य नहर के माध्यम से आगे प्रवाहित होगा। उन्होंने कहा कि इन दोनों योजनाओं के पूर्ण होने से गयाजी के धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई मिलेगी।

पिंडदान, तर्पण एवं पितृपक्ष जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्राप्त होंगी। क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य गयाजी को विश्वस्तरीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर आधारभूत संरचना एवं आधुनिक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

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