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    गया का बिशुनपुर बना रोजगार का हब, रुकने लगा युवाओं का पलायन

    Updated: Mon, 02 Feb 2026 07:43 PM (IST)

    नीति रंजन प्रताप ने 2022 में गया के बिशुनपुर गांव से डेयरी गतिविधि शुरू की, जो अब 80 से अधिक गांवों और 13,000 किसानों को जोड़ने वाला एक सशक्त कृषि मॉड ...और पढ़ें

    कृषि विज्ञान केंद्र मानपुर से पीएम किसान सम्मान पुरस्कार प्राप्त करते उद्यमी नीती रंजन प्रताप। (जागरण)

    कृषि विज्ञान केंद्र मानपुर से पीएम किसान सम्मान पुरस्कार प्राप्त करते उद्यमी नीती रंजन प्रताप। (जागरण)

    HighLights

    1. बिशुनपुर बना रोजगार हब, युवाओं का पलायन रुका।

    2. नीति रंजन ने विकसित किया सफल कृषि-पशुपालन मॉडल।

    3. बिना सरकारी मदद के 13,000 किसानों को जोड़ा।

    रविभूषण सिन्हा, वजीरगंज (गया)। बिहार में कृषि और पशुपालन से जुड़े किसानों की जमीनी समस्याओं को केंद्र में रखकर नीती रंजन प्रताप ने वर्ष 2022 में गया जिले के बिशुनपुर गांव से एक डेयरी गतिविधि की शुरुआत की थी, जो आज 80 से अधिक गांव, 13 हजार से अधिक किसान और 10 हजार एकड़ से अधिक कृषि क्षेत्र को जोड़ने वाला एक सशक्त, संगठित और आत्मनिर्भर किसान मॉडल बन गया है।

    इनके इस प्रयास से यहां कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर आय के साधन उपलब्ध हो जाने से युवाओं का पलायन रुकने लगा है। इस तरह बिशुनपुर गांव फिलहाल रोजगार का हब बना है।

    नीती रंजन द्वारा वर्ष 2022 में बिशुनपुर गांव से शुरू हुई डेयरी गतिविधि से यह स्पष्ट हुआ कि केवल दूध उत्पादन से किसानों की आय स्थायी नहीं हो सकती। खेती, पशुपालन, चारा, मिट्टी और बाजार को जोड़ने वाला एकीकृत माडल किसानों की वास्तविक आवश्यकता है।

    वर्तमान में डेयरी इकाई का टर्नओवर लगभग ढाई करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने डेयरी अनुभव से मिली सीख के आधार पर 2023 में किसानों को संगठित कर एनएएसपी किसान उत्पादक संगठन (FPO) की स्थापना की। यह गया जिले वजीरगंज, फतेहपुर, बोधगया सहित विभिन्न प्रखंडों में सक्रिय है।

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    80 से अधिक गांव के 13000 से अधिक किसानों को अपने साथ जोड़ चुका है। वर्तमान में किसान उत्पादक संगठन की देखरेख में 10,000 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में खेती कराई जा रही है।

    किसान उत्पादक संगठन का कुल टर्नओवर अप्रैल 2025 से अब तक लगभग 15 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। किसान उत्पादक संगठन लगभग 600 एकड़ भूमि में किसानों के सहयोग से बीज उत्पादन का कार्य कर रहा है। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।

    दिया जा रहा नि:शुल्क बीज

    संगठन को बिहार के प्रमुख बीज उत्पादक किसान संगठनों में स्थान मिल रहा है। इस समूह द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र मानपुर के सहयोग से फ्रंट लाइन डेमोंस्ट्रेशन के रूप में लगभग 300 एकड़ क्षेत्र में किसानों को निःशुल्क बीज उपलब्ध कराकर सरसों की खेती कराई जा रही है।

    इस पहल से किसानों को उन्नत किस्म के बीज, वैज्ञानिक खेती पद्धति और उत्पादन वृद्धि का प्रत्यक्ष अनुभव मिल रहा है, जिससे आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाने के प्रति विश्वास बढ़ा है।

    नीती रंजन प्रताप के नेतृत्व में गांव एनएएसपी स्टार्टअप के तहत भारत का पहला मल्टीवेंडर बिडिंग प्लेटफार्म विकसित किया गया है जो किसानों और डेयरी उद्योग को सीधे जोड़ता है।

    जिससे पशु व्यापार में पारदर्शिता, मूल्य निर्धारण और बिक्री में सुविधा बढ़ी है। इनके द्वारा किसानों को सभी कृषि सेवाएं गांव स्तर पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गांव एनएएसपी स्टार्टअप के माध्यम से गांव-गांव में सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से क्षमता निर्माण, वित्तीय लिंकज, इनपुट से लेकर पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन एवं बाजार से सीधा जुड़ाव जैसी सुविधाएं गांव स्तर पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

    कृषि विज्ञान केंद्र, मानपुर इस पहल के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करता है। किसानों को आ रही व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए गांव एनएएसपी शुरू किया गया है।

    नीती रंजन प्रताप द्वारा विकसित नीति चना को भारत सरकार द्वारा पेटेंट प्रदान किया गया है, जो कृषि नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

    इनके इस उपलब्धि को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र मानपुर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान पुरस्कार, कृषि विश्वविद्यालय सबौर से नवाचारी किसान पुरस्कार, बिहार एंटरप्रेन्योर एसोसिएशन से उद्यमिता पुरस्कार सम्मानित किया गया है।यह बता दें कि नीती रंजन ने यह पूरा मॉडल बिना किसी सब्सिडी और बिना किसी सरकारी वित्तीय सहायता के विकसित किया गया है।