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    सीमित संसाधन, बड़ा सपना और ऐतिहासिक सफलता; बिहार के शुभम कैसे बने JEE Advanced टॉपर?

    Updated: Mon, 01 Jun 2026 01:14 PM (IST)

    गयाजी के शुभम कुमार ने जेईई एडवांस 2026 में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल कर इतिहास रचा, जिससे पूरा बिहार गौरवान्वित है। उन्होंने 360 में से 330 अंक प्राप्त ...और पढ़ें

    माता-पिता के साथ शुभम कुमार।

    माता-पिता के साथ शुभम कुमार।

    HighLights

    1. शुभम कुमार ने जेईई एडवांस 2026 में AIR-1 हासिल की।

    2. 360 में से 330 अंक प्राप्त कर देश में प्रथम स्थान।

    3. गया के शुभम ने बिहार को गौरवान्वित किया।

    जागरण संवाददाता, गयाजी। बिहार के लिए गर्व और उत्साह का क्षण उस समय आया जब गयाजी शहर के नादरागंज निवासी शुभम कुमार ने जेईई एडवांस- 2026 में आल इंडिया रैंक-1 (AIR-1) हासिल कर इतिहास रच दिया।

    शुभम ने 360 अंकों में से 330 अंक प्राप्त कर देशभर के लाखों परीक्षार्थियों को पीछे छोड़ दिया। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार बल्कि पूरा गया और बिहार गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

    जेईई एडवांस का परिणाम घोषित होते ही शुभम के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। परिवार, रिश्तेदार, शिक्षक और शुभचिंतक इस सफलता को बिहार के लिए एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।

    शुभम इससे पहले जेईई मेन 2026 के दोनों सत्रों में भी 100 परसेंटाइल हासिल कर अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दे चुके थे।

    दो वर्षों की मेहनत का मिला सुनहरा प्रतिफल

    शुभम ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और नियमित मेहनत को दिया। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से वे पूरी निष्ठा के साथ जेईई एडवांस की तैयारी कर रहे थे।

    प्रतिदिन निर्धारित लक्ष्य के अनुसार अध्ययन करना, कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान देना और निरंतर अभ्यास उनकी सफलता की कुंजी बनी।

    शुभम कहते हैं कि कड़ी मेहनत करने पर अच्छे परिणाम की उम्मीद रहती है, लेकिन देश में पहला स्थान प्राप्त करना बेहद सुखद अनुभव है। यह मेरे माता-पिता और शिक्षकों के विश्वास का परिणाम है।

    साधारण परिवार से निकलकर बने लाखों युवाओं की प्रेरणा

    शुभम के पिता शिव कुमार हार्डवेयर व्यवसाय से जुड़े हैं, जबकि माता कंचन देवी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों वाले एक सामान्य परिवार से आने वाले शुभम ने यह साबित कर दिया कि सफलता का रास्ता मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प से होकर गुजरता है।

    परिवार ने हर कदम पर उनका मनोबल बढ़ाया और पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया।शुभम को उनकी प्रतिभा के आधार पर कोचिंग संस्थान से 100 प्रतिशत स्कालरशिप भी मिली थी।

    वर्तमान में वे कोटा में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे।

    स्कूल को पहले ही था टाॅपर बनने का भरोसा

    ब्रिटिश स्कूल गुरुकुल के निदेशक भीम राज ने शुभम की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि दो वर्ष पहले ही उनकी लगन और समर्पण को देखकर यह अंदाजा हो गया था कि वह राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट स्थान हासिल करेंगे।

    उन्होंने कहा कि शुभम की उपलब्धि विद्यालय के लिए गर्व का विषय है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

    युवाओं के लिए मिसाल बना शुभम का सफर

    शुभम की सफलता यह संदेश देती है कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन जरूरी है।

    एक साधारण परिवार का छात्र देश का टाॅपर बन सकता है तो हर विद्यार्थी अपने लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता रखता है। शुभम की यह उपलब्धि बिहार के लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है और यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधन की मोहताज नहीं होती।

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