गया के क्षितिज कश्यप बने भारतीय सेना में अधिकारी, किसान परिवार के बेटे ने पहले ही प्रयास में रचा इतिहास
गया के क्षितिज कश्यप ने अफसर प्रशिक्षण अकादमी (ओटीए), चेन्नई से पास आउट होकर भारतीय सेना में अधिकारी का पद ...और पढ़ें

अफसर प्रशिक्षण अकादमी चेन्नई के पासिंग आउट परेड के अंतिम पग के साथ गयाजी के लाल क्षितिज कश्यप। सौ. आर्मी
HighLights
गया के क्षितिज कश्यप भारतीय सेना में अधिकारी नियुक्त।
ओटीए चेन्नई से कठिन सैन्य प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।
किसान परिवार के बेटे ने पहले प्रयास में सफलता हासिल की।
जागरण संवाददाता, गयाजी। अफसर प्रशिक्षण अकादमी (ओटीए), चेन्नई के पासिंग आउट परेड में अंतिम पग पार करते ही गया के लाल क्षितिज कश्यप ने भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कदम रखा।
अधिकारी कैडेट के रूप में कठिन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उन्होंने सेना में शामिल होने की उपलब्धि हासिल की। अंतिम पग के दौरान उनके चेहरे पर आत्मविश्वास और आंखों में देशसेवा का जज्बा साफ नजर आया।
पहले ही प्रयास में हासिल की सफलता
नियाजीपुर पोस्ट कुजापी, गया निवासी क्षितिज कश्यप को बचपन से ही भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने का जुनून था। उन्होंने अधिकारी बनने के लिए पहली बार प्रयास किया।
पहले प्रयास में सफलता हासिल कर ली। गया के क्रेन स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की।
क्षितिज ने बताया कि परिवार ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उनके दादा नरेन्द्र कुमार सिंह सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक और दादी श्यामा कुमारी सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं।
उनके पिता किसान हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। परिवार के संस्कार और प्रोत्साहन ने उन्हें अपने सपने को पूरा करने के लिए लगातार प्रेरित किया।
प्रशिक्षण ने सिखाया अनुशासन और नेतृत्व
क्षितिज के अनुसार ओटीए में प्रशिक्षण उनके जीवन का बेहद महत्वपूर्ण अनुभव रहा। सैन्य प्रशिक्षण ने उन्हें एक युवा से अधिक जिम्मेदार, अनुशासित और आत्मविश्वासी व्यक्ति बनाया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और जिम्मेदारी के महत्व को करीब से समझा।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान हर दिन चुनौतीपूर्ण रहा। सुबह से शारीरिक प्रशिक्षण, कक्षाएं, ड्रिल, खेल और अन्य गतिविधियों के कारण दिन पूरी तरह व्यस्त रहता था।
कठिन शारीरिक प्रशिक्षण ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाया। गर्मी के मौसम में प्रशिक्षण लेना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रहा। इससे हर परिस्थिति में काम करने और देश के किसी भी हिस्से में तैनाती के लिए खुद को तैयार करने का आत्मविश्वास मिला।
सिविलियन जीवन से सैन्य अनुशासन तक का सफर आसान नहीं था
क्षितिज ने बताया कि सिविलियन पृष्ठभूमि से आने के कारण सैन्य जीवन उनके लिए बिल्कुल नया अनुभव था। प्रशिक्षण के शुरुआती दौर में अनुशासन, सुबह जल्दी उठने, कठिन शारीरिक अभ्यास और नियमित दिनचर्या के साथ तालमेल बैठाना चुनौतीपूर्ण रहा।
शारीरिक और मानसिक थकान के बावजूद हर दिन समान ऊर्जा और एकाग्रता बनाए रखना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। समय प्रबंधन भी प्रशिक्षण का अहम हिस्सा रहा।
सीमित समय में शारीरिक प्रशिक्षण, पढ़ाई, ड्रिल, खेल और अन्य जिम्मेदारियों को पूरा करना सीखना पड़ा। उन्होंने बताया कि कोर्समेट, परिवार और दोस्तों के सहयोग ने मुश्किल दौर में उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
देशसेवा के संकल्प के साथ बढ़े आगे
भारतीय सेना में अधिकारी बनने के बाद क्षितिज ने देश की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सेना की गरिमा और गौरवशाली परंपराओं को बनाए रखना उनके लिए सर्वोच्च जिम्मेदारी होगी। पूरी निष्ठा, विनम्रता और समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा करना उनका संकल्प है।
गया के एक सामान्य किसान परिवार से निकलकर भारतीय सेना में अधिकारी बनने तक का क्षितिज का सफर क्षेत्र के युवाओं के लिए भी प्रेरणा बना है।
कठिन परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण के बल पर उन्होंने यह साबित किया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
