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मायापुर बना बिहार का मिलेट्स पावर हब, मोटे अनाज की खेती को दे रहा नई दिशा

Published: Thu, 16 Apr 2026 05:14 PM (IST)

गया के मायापुर गांव में बिहार का पहला मिलेट्स अनुसंधान केंद्र स्थापित हुआ है। यह केंद्र मोटे अनाज (श्री अन्न) ...और पढ़ें

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संवाद सूत्र, फतेहपुर (गया)। जिले के टनकुप्पा प्रखंड अंतर्गत मायापुर गांव अब राज्य में कृषि नवाचार का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां बिहार का पहला सेंटर आफ एक्सीलेंस मिलेट्स अनुसंधान केंद्र स्थापित किया गया है।

जो मोटे अनाज (श्री अन्न) की खेती को नई दिशा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बीते माह समृद्धि यात्रा के दौरान मायापुर आकर मिलेट्स रिसर्च सेंटर का विधिवत उद्घाटन किये और सेंटर की सराहना किये।

इस केंद्र में फिंगर मिलेट, फ़ाक्सटेल मिलेट एवं प्रोसो मिलेट की आब्जर्वेशन यील्ड ट्रायल (उपज परीक्षण) के साथ साथ मल्टी लोकेशन ट्रायल भी संचालित किए जा रहे हैं। जिससे विभिन्न जलवायु एवं मिट्टी की परिस्थितियों में इन फसलों की उत्पादकता का वैज्ञानिक आकलन किया जा सके। इससे किसानों को उनकी जमीन के अनुसार बेहतर किस्मों के चयन में सहायता मिलेगी।

केंद्र की विशेषता यह है कि यहां सात प्रकार के मिलेट्स की 18 उन्नत एवं संभावित किस्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। जिन्हें बिहार में अधिसूचित करने की तैयारी है। मिलेट वैरायटल कैफेटेरिया के माध्यम से किसानों को इन किस्मों को देखने, समझने और अपनाने का अवसर मिल रहा है।

साथ ही फाक्सटेल और प्रोसो मिलेट के बीज उत्पादन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। जिससे स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हो सके। इसके अलावा मिलेट आधारित फसल प्रणाली और उन्नत कृषि तकनीकों पर भी अनुसंधान कार्य जारी है।

मायापुर में हैदराबाद की कृषि अनुसंधान कर्ता इक्रिसैट के कॄषि वैज्ञानिक राहुल प्रियदर्शी ने बताया कि मिलेट्स कम पानी में उगने वाली, सूखा सहनशील एवं जलवायु परिवर्तन के अनुकूल फसलें हैं। जो भविष्य की खेती के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होंगी।

पोषण के दृष्टिकोण से भी मिलेट्स का महत्व काफी बढ़ गया है। इनमें प्रचुर मात्रा में फाइबर, आयरन, कैल्शियम एवं आवश्यक विटामिन्स पाए जाते हैं, जो मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग जैसी बीमारियों के खतरे को कम करने में सहायक हैं।

मायापुर स्थित यह अनुसंधान केंद्र न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि श्री अन्न को जन जन तक पहुंचाकर स्वस्थ समाज के निर्माण में भी अहम भूमिका साबित होगी।

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