बिहार-झारखंड बॉर्डर पर अफीम की खेती, गया के जंगलों में ड्रोन से निगरानी; पंजाब-हरियाणा तक जुड़े तार
बिहार-झारखंड सीमा पर गया के बाराचट्टी और धनगांई क्षेत्रों में अफीम की अवैध खेती गंभीर चिंता का विषय बनी हुई ...और पढ़ें

बिहार-झारखंड बॉर्डर पर अफीम की खेती (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
बिहार-झारखंड सीमा पर अफीम की अवैध खेती।
माफिया गरीब ग्रामीणों को मोहरा बनाकर कर रहे खेती।
ड्रोन निगरानी से अफीम की खेती में आई कमी।
संवाद सूत्र, बाराचट्टी (गया)। बिहार-झारखंड सीमा से सटे बाराचट्टी और धनगांई थाना क्षेत्र के जंगलों में प्रतिबंधित मादक पदार्थ अफीम की खेती का मामला गंभीर बना है। भलुआ, जयगीर, बुमेर, पतलुका और झाझ पंचायत के जंगल तथा आसपास के दुर्गम इलाकों में अफीम की खेती होती है। इसकी जानकारी जिला प्रशासन से लेकर अर्द्ध सैनिक बल, नार्कोटिक्स तथा वन विभाग के सामने आती रहती है।
वन विभाग और पुलिस समय-समय पर फसल नष्ट करने की कार्रवाई करती रहती है। उपलब्ध आंकड़ों में वर्ष 2023-24 में अफीम की खेती के खिलाफ सबसे अधिक कार्रवाई की गई। 2024-25 और 2025-26 में कार्रवाई वाले क्षेत्र में कमी आई है।
इसका मतलब यह नहीं माना जा सकता कि पूरे इलाके में अफीम की खेती उसी अनुपात में कम हो गई है। यह आंकड़े उन स्थानों के हैं जहां कार्रवाई की गई है।
ग्रामीणों को बनाया जाता मोहरा
स्थानीय स्तर पर यह बात कही जा रही है कि अफीम की खेती में गरीब और जरूरतमंद ग्रामीणों को अफीम माफिया इस्तेमाल करते हैं। दावा किया जाता है कि खेती के लिए बीज, खाद, सिंचाई और पैसा माफिया उपलब्ध कराते हैं।
फसल तैयार होने के बाद उसे खरीदने और दूसरे स्थानों तक पहुंचाने का काम नेटवर्क से जुड़े लोग करते हैं। ऐसे मामलों में खेत में काम करने वाले मजदूर कार्रवाई की जद में आते हैं।जबकि खेती कराने वालों तक पहुंचना आज भी बड़ी चुनौती है।
चेकडैम और बिजली से सिंचाई
जंगल और तराई वाले इलाकों में अफीम की खेती के लिए चेकडैम और छोटे बांधों के पानी का इस्तेमाल किए जा रहे हैं। कुछ जगहों पर पंपसेट और अवैध बिजली से सिंचाई करने की जानकारी मिली है। जांच में यह सही मिलता है तो सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और अवैध बिजली आपूर्ति पर कार्रवाई की जरूरत होगी।
एनडीपीएस मामलों में दूसरे राज्यों के लोग गिरफ्तार
बाराचट्टी थाना में दर्ज दर्जनों मामले एनडीपीएस एक्ट की प्राथमिकी और पुलिस कार्रवाई में दूसरे राज्यों से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी सामने आई है। नशीले पदार्थों के साथ पकड़े गए आरोपितों में पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों के लोगों का उल्लेख पुलिस कार्रवाई में है। दर्जनों लोग जेल में बंद हैं।

पूर्व में नारे गांव से 28 किलो अफीम के साथ चार लोग पकड़े गए थे। उस मामले में पुलिस ने भलुआ और जयगीर पंचायत के क्षेत्रों में अफीम के कारोबार तथा दूसरे राज्यों के लोगों के यहां से मादक पदार्थ खरीदकर ले जाने की जानकारी दी थी।
बाराचट्टी क्षेत्र से डोडा की बरामदगी के मामलों में दूसरे राज्यों से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी सामने आई है। एक मामले में 291.200 किलो डोडा के साथ हरियाणा के चालक को गिरफ्तार किया गया था। इससे साफ है कि अफीम और डोडा का कारोबार केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है।
झारखंड सीमा से आगे सप्लाई
स्थानीय जानकारी के अनुसार जंगलों में तैयार अफीम और डोडा को पहले सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद झारखंड सीमा की ओर जाने वाले रास्तों तथा अन्य मार्गों से बाहर भेजे जाने की बात कही जा रही है।
पूर्व की पुलिस कार्रवाई में पंजाब और हरियाणा तक सप्लाई की कड़ी सामने आ चुकी है। इसलिए खेत में लगे फसल नष्ट करने के साथ-साथ उसे खरीदने, ले जाने और आगे सप्लाई करने वालों तक पहुंचना जरूरी है।
इतना ही नहीं बाराचट्टी के बाद इस खेती को माफियाओं द्वारा गया जिला के इमामगंज और डुमरिया थाना क्षेत्र में तीन वर्ष पूर्व से प्रारंभ किया गया है। लेकिन इमामगंज के वनो के क्षेत्र पदाधिकारी गौतम कुमार इन बातों से खुद को अनजान बताते हैं।
ड्रोन से होती निगरानी, खेती हुआ कम
बाराचट्टी वन क्षेत्र पदाधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि विभाग अपने स्तर से अफीम की खेती वाले क्षेत्रों की जानकारी जुटाता है। सूचना मिलने पर कार्रवाई की जाती है। उनके अनुसार ड्रोन से निगरानी शुरू होने के बाद अफीम की खेती में काफी कमी आई है।
आंकड़ों पर एक नजर
| वित्तीय वर्ष | कांड | नामजद बदमाश संख्या | कार्रवाई वाली भूमि (एकड़ में) |
|---|---|---|---|
| 2020-21 | 103 | 142.36 | |
| 2021-22 | 188 | 267.45 | |
| 2023-24 | 31 | 226 | 402.92 |
| 2024-25 | 29 | 185 | 138.19 |
| 2025-26 | 25 | 93 | 84.60 |
| कुल | 85 | 795 | 1035.52 |
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