PM मोदी ने खाई झाल मुड़ही; गया का युवक बना नेशनल स्टोरी, छोटी दुकान पहुंची सुर्खियों में
गया के एक छोटे से झाल मुड़ही विक्रेता, विक्रम साव की दुकान पर प्रधानमंत्री मोदी के पहुंचने से वह राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया। प्रधानमंत्री ने न केवल ...और पढ़ें
HighLights
PM मोदी ने गया के विक्रम की दुकान पर झाल मुड़ही खाई
विक्रम साव की दुकान कोलकाता के झालग्राम में है
गाँव में ख़ुशी की लहर, विक्रम का परिवार कोलकाता में
संवाद सूत्र, फतेहपुर (गया)। कभी साधारण ठेले पर झाल मुड़ही बेचने वाले गया जिले के एक युवक की किस्मत उस वक्त बदल गई, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद उसकी दुकान पर पहुंचे।
उन्होंने न सिर्फ झाल मुड़ही खरीदी, बल्कि वहीं बैठकर खाई और दुकानदार से आत्मीय बातचीत भी की। यह दृश्य देखते ही देखते सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक छा गया।
मनमाधाे गांव का रहने वाला है विक्रम साव
यह कहानी टनकुप्पा प्रखंड के चोवार पंचायत अंतर्गत मनमाधो गांव निवासी विक्रम साव की है, जिनकी कोलकाता के झालग्राम स्थित दुकान आज चर्चा का केंद्र बन चुकी है।
चुनावी सभा के बाद व्यस्त कार्यक्रम के बीच प्रधानमंत्री ने कुछ समय निकालकर विक्रम की साधारण दुकान पर रुककर झाल मुड़ही खाई और उनसे सहज अंदाज में बातचीत की।
बताया जाता है कि प्रधानमंत्री ने 10 रुपये की झाल मुड़ही खरीदी। विक्रम ने पैसे लेने से इंकार किया, लेकिन प्रधानमंत्री ने अपनी सादगी का परिचय देते हुए खुद 10 रुपये का नोट देकर भुगतान किया।

(गया के मनमाधो गांव में विक्रम साव का घर।)
यह खास पल कैमरे में कैद हो गया और देखते ही देखते वायरल हो गया। विक्रम साव के पिता उत्तम साव पिछले 30 वर्षों से कोलकाता में रहकर यही व्यवसाय करते थे।
करीब 10 वर्ष पहले विक्रम ने खुद किराये पर दुकान लेकर मसाला और झाल मुड़ही का काम शुरू किया। बचपन से ही वह पिता के साथ इस काम में हाथ बंटाते रहे।
काेलकाता के झारग्राम में रहता है पूरा परिवार
आज विक्रम का पूरा परिवार कोलकाता में रहता है, जबकि गांव में उनका घर फिलहाल बंद है। जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, लोगों को पहले विश्वास नहीं हुआ।
लेकिन जब टीवी और मोबाइल पर तस्वीरें सामने आईं तो पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। विक्रम के बड़े भाई शंकर साव बताते हैं कि विक्रम शुरू से ही मेहनती और सरल स्वभाव का रहा है।
ग्रामीण अनिल कुमार (शिक्षक), बिहारी बाबा, चंदर साव, मुखिया प्रतिनिधि श्रीकांत चौधरी और राजेश शर्मा ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया।
गांव के लोगों में खुशी की लहर
गांव के लोगों का कहना है कि एक साधारण दुकानदार के पास देश के प्रधानमंत्री का इस तरह पहुंचना यह साबित करता है कि मेहनत और लगन से कोई भी व्यक्ति ऊंचाई तक पहुंच सकता है।
विक्रम साव की यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि उस सपने की मिसाल है, जिसमें छोटे गांव का युवक भी अपनी मेहनत से देशभर में पहचान बना सकता है।
मनमाधो गांव में लगभग 250 घर हैं और आबादी करीब 2500 के आसपास है। यहां मुख्य रूप से पिछड़ा वर्ग के लोग निवास करते हैं। यह गांव अपनी सामाजिक एकता और पहचान के लिए क्षेत्र में जाना जाता है।