गर्मी का असर स्कूलों पर: 6 अप्रैल से बदला टाइम, सुबह 6:30 बजे खुलेंगे विद्यालय
बिहार में बढ़ती गर्मी के कारण स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। शिक्षा विभाग ने बच्चों को तेज धूप से बचाने के लिए यह निर्णय लिया है। गोपालगंज जिले ...और पढ़ें

गोपालगंज जिले के सभी सरकारी विद्यालय 6 अप्रैल से सुबह 6:30 बजे से
संवाद सूत्र, मांझा (गोपालगंज)। बिहार में बढ़ती गर्मी को देखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। शिक्षा विभाग ने बच्चों को राहत देने के लिए यह निर्णय लिया है। अब जिले के सभी सरकारी विद्यालय सुबह जल्दी खुलेंगे। यह बदलाव 6 अप्रैल से लागू किया जाएगा।
तापमान में लगातार वृद्धि को इसका मुख्य कारण बताया गया है। इससे बच्चों को तेज धूप से बचाया जा सकेगा।
सुबह 6:30 बजे से शुरू होंगी कक्षाएं
नए आदेश के अनुसार विद्यालय सुबह 6:30 बजे खुलेंगे। दोपहर 12:30 बजे तक सभी शैक्षणिक गतिविधियां चलेंगी। सुबह का समय पढ़ाई के लिए अधिक अनुकूल माना गया है।
इससे छात्रों की उपस्थिति पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। शिक्षकों को समय का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। सभी स्कूलों को नई समय-सारणी लागू करने को कहा गया है।
प्रार्थना और चेतना सत्र का समय तय
विद्यालय खुलने के बाद 7 बजे तक प्रार्थना होगी। इसी दौरान चेतना सत्र भी आयोजित किया जाएगा। इसके बाद नियमित कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। छात्रों को अनुशासन और दिनचर्या का पालन कराया जाएगा।
यह सत्र बच्चों के मानसिक विकास के लिए भी अहम है। नई दिनचर्या को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाएगा।
सात पीरियड में होगी पढ़ाई
7 बजे से 7:40 तक पहली घंटी चलेगी। इसके बाद क्रमशः दूसरी और तीसरी कक्षा संचालित होगी। 9 बजे तक तीन पीरियड पूरे हो जाएंगे।
इसके बाद मध्यांतर का समय निर्धारित किया गया है। सभी कक्षाओं के लिए स्पष्ट समय तय किया गया है। इससे पढ़ाई व्यवस्थित ढंग से हो सकेगी।
मध्यांतर में मिलेगा भोजन
9 बजे से 9:40 तक मध्यांतर रहेगा। इसी दौरान छात्रों को मध्याह्न भोजन दिया जाएगा। इसके बाद फिर से कक्षाएं शुरू होंगी। चौथी से सातवीं घंटी तक पढ़ाई जारी रहेगी।
हर पीरियड के लिए समय निर्धारित किया गया है। छात्रों को पूरी पढ़ाई का समय मिलेगा।
छुट्टी के बाद शिक्षकों की समीक्षा
सातवीं घंटी के बाद छात्रों की छुट्टी कर दी जाएगी। इसके बाद शिक्षक 10 मिनट तक पढ़ाए गए विषयों की समीक्षा करेंगे। यह समय शिक्षण गुणवत्ता सुधारने के लिए रखा गया है।
शिक्षा विभाग ने इसे अनिवार्य बताया है। सभी विद्यालयों को निर्देश का पालन करने को कहा गया है। नई व्यवस्था से पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों पर ध्यान दिया गया है।