बिहार में 31 अक्टूबर तक पूरा होगा शिक्षकों का ट्रांसफर, 1 नवंबर से खास काम की शुरुआत, शिक्षा मंत्री का एलान
शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार तिवारी ने घोषणा की कि बिहार में शिक्षकों के सभी स्थानांतरण 31 अक्टूबर तक पूरे हो जाएंगे। 1 नवंबर से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा स ...और पढ़ें

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी। फाइल
HighLights
शिक्षकों के सभी स्थानांतरण 31 अक्टूबर तक पूरे होंगे।
1 नवंबर से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा निगरानी अभियान शुरू होगा।
शिक्षकों की पसंद के 30 स्कूलों की सूची मांगी गई।
संवाद सूत्र, कुचायकोट (गोपालगंज)। बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार तिवारी ने कहा कि शिक्षा विभाग में चल रही सभी स्थानांतरण प्रक्रियाएं 31 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएंगी।
इसके बाद 1 नवंबर से राज्य के विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी शिक्षक का जबरन स्थानांतरण नहीं किया जाएगा।
शिक्षकों की सुविधा और विद्यालयों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया संपन्न होगी। वे रविवार को कुचायकोट प्रखंड के भठवां स्थित डीएपी (पी) आईटीआई परिसर में आयोजित सत्र शुभारंभ एवं सम्मान समारोह में बोल रहे थे।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों को अपनी व्यक्तिगत समस्याओं से ऊपर उठकर बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए समर्पित भाव से कार्य करना होगा।
शिक्षा में सुधार केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि शिक्षकों की सकारात्मक सोच और सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।

30 स्कूलों की मांगी गई है सूची
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ शिक्षा मंत्री ने आयोजक मनोज तिवारी, सुधांशु मिश्रा, प्रमुख प्रतिनिधि अखिलेश सिंह, जितेंद्र चौबे तथा अन्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
संस्थान के प्राचार्य संदीप कुमार और निदेशक रवि रंजन ने शिक्षा मंत्री का प्रतीक चिह्न एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य के कई विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या आवश्यकता से अधिक है, जबकि अनेक विद्यालय शिक्षक की कमी से जूझ रहे हैं।
इसी असंतुलन को दूर करने के लिए अधिशेष शिक्षकों का स्थानांतरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक शिक्षक से उनकी पसंद के 30 विद्यालयों की सूची मांगी गई है, ताकि यथासंभव उनकी इच्छा के अनुरूप पदस्थापन किया जा सके।
छठी के बाद होगी ब्रेन मैपिंग
उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा को व्यवहारिक और व्यावसायिक स्वरूप देने की दिशा में कार्य कर रही है। कक्षा छह के बाद विद्यार्थियों की ब्रेन मैपिंग कर उनकी रुचि के अनुसार तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा की ओर उनका मार्गदर्शन किया जाएगा।
साथ ही सरकारी विद्यालयों में भी निजी स्कूलों की तर्ज पर बाल वाटिका की व्यवस्था विकसित की जाएगी। आंगनबाड़ी केंद्रों को भी बाल वाटिका के रूप में सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि बच्चों को प्रारंभिक स्तर से ही विद्यालयी शिक्षा के लिए बेहतर ढंग से तैयार किया जा सके।
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समारोह में राजेंद्र पांडेय, सर्वेश तिवारी, आमोद पांडेय, शिव कुमार उपाध्याय, मनजीत त्रिपाठी, लव चौबे, शिवनाथ कुशवाहा, परमा सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।