गोपालगंज कलेक्ट्रेट में अब लगेगी बायोमेट्रिक हाजिरी, लेट आए तो कटेगी सैलरी; 1 मई से लागू होगा नया सिस्टम
गोपालगंज कलेक्ट्रेट में अब बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है, जो 1 मई से प्रभावी होगी। लापरवाही बरतने पर वेतन कटौती और कार्रवाई की चेतावनी दी ...और पढ़ें

गोपालगंज कलेक्ट्रेट में अब लगेगी बायोमेट्रिक हाजिरी, लेट आए तो कटेगी सैलरी

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, गोपालगंज। शहर के कलेक्ट्रेट परिसर में कार्यरत पदाधिकारियों व कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर अब सख्ती शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा के निर्देश पर कलेक्ट्रेट में बायोमेट्रिक मशीन स्थापित कर दी गई है। जिसके माध्यम से सभी कर्मियों और अधिकारियों की उपस्थिति दर्ज की जाएगी।
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद मनमानी व लापरवाही पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
डीएम पवन कुमार सिन्हा ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि बायोमेट्रिक प्रणाली एक मई से पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगी। इसके तहत सभी कर्मियों को कार्यालय आने और जाने के समय मशीन पर अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इससे न केवल समयपालन सुनिश्चित होगा, बल्कि कार्यालयी कार्यों में पारदर्शिता भी आएगी।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जो भी कर्मचारी या पदाधिकारी इस व्यवस्था में लापरवाही बरतेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं करने या नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में संबंधित कर्मियों के वेतन में कटौती भी की जा सकती है। यह कदम प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक अनुशासित और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि बायोमेट्रिक मशीन के जरिए दर्ज की गई उपस्थिति के आधार पर ही वेतन तैयार किया जाएगा। इससे फर्जी उपस्थिति या अनियमितता की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
उन्होंने सभी कर्मियों को निर्देश दिया है कि वे समय से कार्यालय पहुंचें और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें। इसके अलावा, इस व्यवस्था को केवल कलेक्ट्रेट तक सीमित नहीं रखा जाएगा।
डीएम ने कहा कि सदर अस्पताल सहित जिले के सभी सरकारी कार्यालयों में भी चरणबद्ध तरीके से बायोमेट्रिक मशीन लगाने का कार्य किया जाएगा। इससे पूरे जिले में सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और आम जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।
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प्रशासन के इस फैसले को पारदर्शिता और अनुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल सरकारी कामकाज में गति आएगी, बल्कि आम लोगों का भरोसा भी प्रशासन पर मजबूत होगा।