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    बिहार के GNM ट्रेनिंग संस्थान में छात्राओं की शादी पर रोक आदेश वापस, प्रिंसिपल को भेजा गया नोटिस

    Updated: Wed, 22 Apr 2026 11:33 AM (IST)

    हथुआ के जीएनएम प्रशिक्षण संस्थान में छात्राओं के विवाह पर रोक लगाने वाले विवादित पत्र को सिविल सर्जन ने रद्द कर दिया है। ...और पढ़ें

    छात्राओं की शादी पर रोक। ग्राफिक्स एआई जनरेटेड

    छात्राओं की शादी पर रोक। ग्राफिक्स एआई जनरेटेड

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    संवाद सूत्र, हथुआ (गोपालगंज)। हथुआ स्थित जीएनएम प्रशिक्षण संस्थान में छात्राओं के विवाह पर रोक लगाने से जुड़े विवादित पत्र के मामले में शनिवार को नया मोड़ आ गया।

    सिविल सर्जन डॉ. वीरेंद्र प्रसाद ने संस्थान पहुंचकर पूरे मामले की वस्तुस्थिति का जायजा लिया और प्रिंसिपल द्वारा जारी विवादित पत्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। साथ ही प्रिंसिपल मानसी सिंह को शो काज नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।

    शादी करने पर एडमिशन रद करने का आदेश 

    जानकारी के अनुसार, जीएनएम संस्थान की प्रिंसिपल द्वारा जारी पत्र में शैक्षणिक सत्र के दौरान छात्राओं के विवाह पर रोक लगाई गई थी। पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि यदि किसी छात्रा ने प्रशिक्षण अवधि के दौरान विवाह किया, तो उसका नामांकन रद्द कर दिया जाएगा।

    इस आदेश के सामने आने के बाद छात्राओं और उनके अभिभावकों में भारी नाराजगी फैल गई थी। कई छात्राओं ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया, वहीं अभिभावकों ने भी इस तरह के आदेश पर सवाल उठाए। मामला तेजी से चर्चा में आया और प्रशासन तक पहुंच गया।

    लोगों ने इसे अनुचित और अजीबोगरीब फरमान बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया। डीएम पवन कुमार सिन्हा के निर्देश पर एसडीओ ने जांच शुरू कराई। इसी क्रम में सिविल सर्जन डॉ. वीरेंद्र प्रसाद शुक्रवार की संध्या पूरे मामले की जांच कराई।

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    प्रिंसिपल को अधिकार नहीं 

    सिविल सर्जन ने बताया कि पहले उन्हें इस तरह के किसी पत्र की जानकारी नहीं थी, लेकिन मामला सामने आने के बाद जांच कराई गई। जांच में पत्र जारी होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद इसे तत्काल प्रभाव से रद कर दिया गया।

    इसके साथ ही प्रिंसिपल मानसी सिंह को शो कॉज नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में पूछा गया है कि उन्होंने किन परिस्थितियों में इस प्रकार का आदेश जारी किया।

    साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि उन्हें ऐसा पत्र जारी करने का निर्देश किसने दिया था। इस कार्रवाई के बाद छात्राओं और अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। सिविल सर्जन डॉ. विरेंद्र प्रसाद ने बताया कि इस तरफ का फैसला लेने का कोई अधिकार प्रिंसपल को नहीं है।

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