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    गोपालगंज: NOC के जाल में फंसे 3 पुल, शिलान्यास के एक साल बाद भी नहीं शुरू हुआ निर्माण

    Updated: Wed, 24 Jun 2026 04:11 PM (IST)

    गोपालगंज के मांझा प्रखंड में मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के तहत स्वीकृत तीन पुलों का निर्माण कार्य गंडक विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र न मिलने के का ...और पढ़ें

    NOC के जाल में फंसे 3 पुल, शिलान्यास के एक साल बाद भी नहीं शुरू हुआ निर्माण

    NOC के जाल में फंसे 3 पुल, शिलान्यास के एक साल बाद भी नहीं शुरू हुआ निर्माण

    HighLights

    1. मांझा में तीन पुलों का निर्माण एक साल से अटका।

    2. गंडक विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र न मिलने से देरी।

    3. 11 करोड़ से अधिक की परियोजना, हजारों लोग प्रभावित।

    राजेश कुमार, मांझा (गोपालगंज)। मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के तहत मांझा प्रखंड में स्वीकृत तीन महत्वपूर्ण पुलों का निर्माण कार्य गंडक विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्रक्रिया में उलझकर रह गया है। करीब 11 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली इन परियोजनाओं का जुलाई 2025 में शिलान्यास किया गया था।

    निर्माण कार्य शुरू करने से लेकर पूरा करने तक की अवधि भी निर्धारित कर दी गई थी, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी धरातल पर एक ईंट तक नहीं रखी जा सकी है। इससे क्षेत्र के हजारों लोगों को आज भी आवागमन की पुरानी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।

    ग्रामीण कार्य विभाग ने शिलान्यास के बाद निर्माण स्थलों पर लागत, संवेदक, कार्य प्रारंभ एवं समाप्ति तिथि अंकित करते हुए शिलापट्ट भी लगा दिए थे।

    लोगों को उम्मीद थी कि वर्षों से चली आ रही आवागमन की समस्या दूर होगी और गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय तथा बाजारों से आसान हो जाएगा, लेकिन शिलान्यास के बाद योजनाएं फाइलों से बाहर नहीं निकल सकीं।

    धनखड़ बीन टोली एवं हरिजन बस्ती के बीच सारण मुख्य नहर पर 2.73 करोड़ रुपये की लागत से 30.26 मीटर लंबा पुल प्रस्तावित है।

    इसी तरह बहोराहाता गांव के समीप सारण मुख्य नहर पर करीब चार करोड़ रुपये तथा कर्णपुरा और पथरा गांव के बीच करीब 3.71 करोड़ रुपये की लागत से पुल निर्माण होना है। तीनों परियोजनाओं की कुल लागत 11 करोड़ रुपये से अधिक है। बावजूद इसके निर्माण स्थल आज भी वीरान पड़े हैं।

    हजारों लोगों के लिए जीवनरेखा साबित होते ये पुल

    यदि ये पुल बन जाते तो बहोराहाता, रामनगर, देवापुर, धनखड़, पिपरा, आकिल टोला, उमर मठिया समेत आदमापुर पंचायत के कई गांवों के 10 से 15 हजार लोगों का आवागमन आसान हो जाता। धनखड़ गांव का सीधा संपर्क प्रखंड मुख्यालय से स्थापित होता और लोगों का समय व खर्च दोनों बचते।

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    वहीं कर्णपुरा-पथरा पुल बनने से पथरा, मुजौना, शेख परसा और मिश्रवलिया गांव के करीब तीन हजार लोगों को सीधा लाभ मिलता।

    बरसात के दिनों में जिन रास्तों पर लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, वहां राहत मिलती। ग्रामीणों का कहना है कि इन पुलों का निर्माण क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाता।

    शिलान्यास से जगी उम्मीदें, इंतजार में बदलीं

    ग्रामीण बताते हैं कि शिलान्यास के समय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने जल्द निर्माण शुरू होने का भरोसा दिलाया था। सूचना पट्ट लगने के बाद लोगों को लगा कि अब वर्षों पुरानी मांग पूरी होने वाली है। लेकिन एक साल बाद भी हालात नहीं बदले हैं। निर्माण स्थलों पर न तो कोई मशीन पहुंची और न ही किसी तरह की तैयारी दिखाई दी।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में समस्या और बढ़ जाती है। मरीजों, छात्रों और किसानों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में करोड़ों रुपये की स्वीकृत योजनाओं का अधर में लटका रहना लोगों को निराश कर रहा है।

    एनओसी बना सबसे बड़ा रोड़ा

    ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार परियोजनाओं में देरी की मुख्य वजह गंडक विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलना है। विभाग का कहना है कि तकनीकी स्वीकृतियों की प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।

    क्या कहते हैं अधिकारी?

    गंडक विभाग द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य में विलंब हो रहा है। अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलते ही तीनों पुलों का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। - चंदन कुमार, सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, गोपालगंज

    एक नजर में

    • जुलाई 2025 में हुआ था तीन पुलों का शिलान्यास
    • 11 करोड़ रुपये से अधिक की कुल लागत
    • एक वर्ष बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं
    • 15 हजार से अधिक आबादी को मिलना है सीधा लाभ
    • गंडक विभाग से एनओसी नहीं मिलने से अटकी परियोजनाएं