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    एनएच-727बी बाईपास से बदलेगा भोरे का भविष्य; जमीन अधिग्रहण शुरू, क‍िसानों से मांगे गए कागजात

    Updated: Sat, 07 Feb 2026 05:17 PM (IST)

    गोपालगंज के भोरे प्रखंड में एनएच-727बी बाईपास निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। पथ निर्माण विभाग ने भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों को 16 फरवरी तक आवश्य ...और पढ़ें

    HighLights

    1. एनएच-727बी बाईपास निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण तेज।

    2. किसानों को 16 फरवरी तक कागजात जमा करने का नोटिस।

    3. मुआवजे को लेकर कुछ किसानों में असंतोष व्याप्त।

    संवाद सूत्र,फुलवरिया/भोरे(गोपालगंज)। राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-727बी (NH 727B) के भोरे प्रखंड से गुजरने वाले प्रस्तावित बाईपास के निर्माण की कवायद तेज कर दी गई है।

    पथ निर्माण विभाग ने सड़क के अधिकृत क्षेत्र में आने वाली भूमि के स्वामियों को नोटिस जारी कर 16 फरवरी तक आवश्यक कागजात जमा करने का निर्देश दिया है।

    यह नोटिस उन किसानों को दिया गया है, जिनकी जमीन प्रस्तावित सड़क मार्ग के दायरे में आ रही है। जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के भिंगारी बाजार के दक्षिण-पश्चिम हिस्से से गुजरते हुए यह बाईपास भोरे प्रखंड के मलचौर, भानपुर, बैकुंठपुर सिसई और रुद्रपुर गांवों से होते हुए भोरे-भींगारी मुख्य पथ से जुड़ेगा।

    दो दर्जन से अधिक किसानों को नोटिस

    विभाग ने सड़क निर्माण के लिए भूमि का चयन कर लिया है और अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
    पथ निर्माण विभाग की ओर से पांच गांवों के लगभग दो दर्जन किसानों को नोटिस जारी किया गया है, ताकि वे समय रहते अपनी जमीन से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज कार्यालय में जमा कर सकें।

    नोटिस प्राप्त किसानों में सिसई गांव के रामाशीष, संजय पांडेय और लाल बिहारी शामिल हैं। विभाग का कहना है कि कागजात सत्यापन के बाद पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।

    विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन बिहार में भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया लंबित होने के कारण कार्य योजना अधर में थी।

    प्रशासनिक सक्रियता के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जैसे ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होगी, बिहार के इन गांवों से होकर गुजरने वाले हिस्से में सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इससे क्षेत्रीय आवागमन सुगम होगा और व्यापार एवं विकास को भी गति मिलने की संभावना है।

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    कुछ किसानों में है नाराजगी

    हालांकि, प्रस्तावित बाईपास सड़क के दोनों ओर कीमती भूमि वाले कुछ किसानों में नाराजगी भी देखी जा रही है। उनका कहना है कि विभाग की ओर से मुआवजा निर्धारण केवल सिंचित और असिंचित भूमि के आधार पर किया जा रहा है।

    जबकि सड़क किनारे की जमीन इन दोनों श्रेणियों से कहीं अधिक मूल्यवान है। किसानों ने मांग की है कि सड़क किनारे की भूमि का विशेष मूल्यांकन कर उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें किसी प्रकार का नुकसान न उठाना पड़े।

    सड़क निर्माण के लिए जारी नोटिस और मुआवजा प्रक्रिया पर प्रशासन की सक्रियता के बाद उम्मीद है कि जल्द ही परियोजना का कार्य शुरू होगा और क्षेत्रीय विकास में तेजी आएगी।