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मगध के ‘देवघर’ की बदलेगी तस्वीर, गांवों के परिसीमन का खाका तैयार

Published: Wed, 16 Sep 2026 03:16 PM (IST)

ऐतिहासिक वाणावर को नगर पंचायत का दर्जा देने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं का विस्तार होगा और पर्यटन को नई गति मिलेगी।

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HighLights

  1. वाणावर को नगर पंचायत का दर्जा देने की प्रक्रिया जारी।

  2. पर्यटन विकास और नागरिक सुविधाओं में होगा विस्तार।

  3. प्राचीन गुफाएं, सिद्धेश्वर नाथ मंदिर, रोपवे प्रमुख आकर्षण।

जागरण संवाददाता, जहानाबाद। प्राचीन गुफाओं की स्थापत्य कला, ऐतिहासिक विरासत और बाबा सिद्धेश्वर नाथ की आस्था को अपने में समेटे वाणावर अब विकास की नई इबारत लिखने की तैयारी में है।

ऐतिहासिक वाणावर को नगर पंचायत का दर्जा देने की प्रक्रिया चल रही है। नगर पंचायत बनने के बाद न केवल क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं का विस्तार होगा, बल्कि पर्यटन विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

परिसीमन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है और जल्द ही विभागीय स्तर पर इसकी घोषणा किए जाने की बात सामने आ रही है।सामान्य क्षेत्रों में नगर पंचायत गठन के लिए न्यूनतम 12 हजार आबादी तथा 50 से 75 प्रतिशत आबादी का गैर-कृषि कार्यों में शामिल होना आवश्यक माना जाता है।

हालांकि पर्यटन, तीर्थ और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विशेष प्रविधान है। इसके तहत नौ हजार की आबादी पर भी नगर पंचायत का गठन संभव है। वाणावर के ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन महत्व को देखते हुए इसी विशेष श्रेणी के तहत नगर पंचायत बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद नियमित सफाई, ठोस कचरा प्रबंधन, जलनिकासी, स्ट्रीट लाइट और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग, विश्रामालय, सूचना संकेतक, पहुंच मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था को भी बेहतर किया जा सकेगा।

स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन, पर्यटन मार्गदर्शन और हस्तशिल्प जैसी गैर-कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

प्राचीन गुफाएं और बाबा सिद्धेश्वर नाथ हैं पहचान

वाणावर की पहचान केवल इसकी हरी-भरी पहाड़ियों और प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है। यहां की प्राचीन गुफाएं देश की महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहरों में शामिल हैं। मौर्यकाल में आजीवक संप्रदाय के लिए निर्मित इन गुफाओं की चमकदार पॉलिश, स्थापत्य शैली और ध्वनि प्रतिध्वनि पर्यटकों को आकर्षित करती है।

वहीं, पहाड़ की चोटी पर स्थित बाबा सिद्धेश्वर नाथ मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। यही कारण है कि वाणावर को मगध का देवघर भी कहा जाता है।

49 करोड़ से पहाड़ी का हो रहा कायाकल्प

मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना के तहत वाणावर पहाड़ी का कायाकल्प भी जारी है। पातालगंगा से लेकर पहाड़ की चोटी पर स्थित बाबा सिद्धेश्वर नाथ मंदिर तक विकास कार्य कराए जा रहे हैं।

वन विभाग 49 करोड़ आठ लाख रुपये की लागत से योजना को धरातल पर उतार रहा है। इसे मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

अब तक करीब 50 प्रतिशत कार्य पूरा होने की जानकारी है। मंदिर तक सुरक्षित पहुंच के लिए 10.30 फीट चौड़ा मार्ग तैयार किया गया है।

सीढ़ियों पर लाल बालू पत्थर लगाने का कार्य पूरा हो चुका है। रेलिंग के साथ बेंच, शेल्टर, शेड और गज़ेबो भी बनाए गए हैं। यहां बैठकर पर्यटक वाणावर की मनोरम वादियों का आनंद ले सकेंगे।

करीब 23 करोड़ की लागत से रोपवे का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है, जिसके बाद 100 फीट ऊंची पहाड़ी पर चढ़ना बेहद आसान हो जाएगा।

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