बिहार में अब पशुओं की मौत पर भी मिलेगा मुआवजा, क्या है आपदा विभाग की नई योजना?
बिहार में प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, सूखा, आकाशीय बिजली और आगजनी में पशुधन की क्षति पर अब मुआवजा मिलेगा। इस नई योजना के तहत गाय, भैंस, घोड़े सहित अन् ...और पढ़ें

बकरी को दवा पिलाती पशु सखी। फाइल फोटो
HighLights
प्राकृतिक आपदाओं में पशुधन क्षति पर मिलेगा मुआवजा।
गाय, भैंस, घोड़े सहित पोल्ट्री को मिलेगी सहायता।
आवेदन के लिए पोस्टमार्टम और सत्यापन अनिवार्य होगा।
जागरण संवाददाता, अरवल। प्राकृतिक आपदाओं में पशुधन की क्षति झेलने वाले पशुपालकों को अब मुआवजा मिलेगा। बाढ़, सुखाड़, आकाशीय बिजली और आगजनी जैसी प्राकृतिक आपदाओं में पशुओं की मौत होने पर निर्धारित दर से मुआवजा देने का प्रविधान किया गया है।
आपदा विभाग के अनुसार, योजना के तहत गाय, भैंस, ऊंट आदि की मौत होने पर प्रति पशु 37 हजार 500 रुपये की सहायता मिलेगी। बैल और घोड़े की मौत पर 32 हजार रुपये, जबकि बछड़ा, गदहा, खच्चर की मौत होने पर 20 हजार रुपये की सहायता राशि निर्धारित की गई है।
बकरी, भेड़ और सूअर की मृत्यु पर प्रति पशु 4 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। यदि प्राकृतिक आपदा में पोल्ट्री फार्म को नुकसान होता है तो प्रति 100 मुर्गियों के नुकसान पर 10 हजार रुपये की सहायता राशि मिलेगी।
इसके अलावा पशुओं के रहने के लिए बने शेड के क्षतिग्रस्त होने पर तीन हजार रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। जिले में बाढ़ और आकाशीय बिजली जैसी घटनाओं में हर वर्ष कई पशुपालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
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ऐसे समय में सहायता अनुदान से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहयोग मिलेगा जिससे दोबारा पशुपालन शुरू कर अपनी आजीविका चलाएंगे।
ऐसे करें आवेदन
प्रभावित पशुपालक को सबसे पहले अपने स्थानीय अंचल कार्यालय में आवेदन देना होगा। आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज और क्षति का संक्षिप्त विवरण भी देना होगा। इसके बाद पंचायत के जनप्रतिनिधियों से घटना का सत्यापन कराया जाएगा।
सत्यापन के बाद सीओ मामले की सूचना जिला पशुपालन विभाग को भेजेंगे। सूचना मिलने पर संबंधित क्षेत्र के सरकारी पशु चिकित्सक घटनास्थल पर पहुंचकर मृत पशु का पोस्टमार्टम करेंगे और विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करेंगे।
यह रिपोर्ट जिला आपदा प्रबंधन विभाग को भेजी जाएगी। सभी अभिलेखों और रिपोर्ट की जांच के बाद पात्र पाए जाने पर निर्धारित सहायता राशि स्वीकृत कर लाभुक के बैंक खाते में सीधे भुगतान किया जाएगा।
क्या कहते हैं पदाधिकारी?
प्राकृतिक आपदा बाढ़, ठनका, आगजनी या फिर बिजली के पोल तार में सटने से मौत होने पर सरकारी अनुदान के लिए मृत पशुओं को पोस्टमार्टम कराना जरूरी है तभी अनुदान मिलेगा। आपदा में पशुधन की क्षति होने की खबर मिलने पर घटनास्थल पर चिकित्सक की टीम को भेजा जाता है। -डॉक्टर अमित कुमार, जिला पशुपालन पदाधिकारी