अरवल नशा मुक्ति केंद्र खुद 'बीमार', 9 साल में भर्ती हुए सिर्फ 8 मरीज; संसाधनों की कमी से लौटने को मजबूर हो रहे लोग
अरवल सदर अस्पताल का नशा मुक्ति केंद्र संसाधनों की कमी से जूझ रहा है, जिससे अधिकांश मरीजों को केवल काउंसलिंग के बाद लौटना पड़ता है। पिछले 9 सालों में स ...और पढ़ें

अरवल नशा मुक्ति केंद्र खुद बीमार
HighLights
नशा मुक्ति केंद्र संसाधनों की कमी से जूझ रहा है।
पिछले 9 वर्षों में केवल 8 मरीज ही भर्ती हुए।
प्रतिदिन औसतन 15 मरीज निराश होकर वापस लौटते हैं।
अभिषेक कुमार, कलेर (अरवल)। बेटे, पति या भाई को नशे की लत से छुटकारा दिलाने की उम्मीद लेकर जब कोई परिवार सदर अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र पहुंचता है, तो उसके मन में नई जिंदगी की आस होती है। लेकिन इलाज की सीमित व्यवस्था के कारण अधिकांश मरीजों को केवल काउंसलिंग के बाद घर लौटना पड़ता है।
जिले में बढ़ती नशाखोरी के बीच नशा मुक्ति केंद्र खुद संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है। शराबबंदी लागू होने के बाद सरकार ने नशे की लत से पीड़ित लोगों को उपचार उपलब्ध कराने के लिए सदर अस्पताल में एक अप्रैल 2016 को नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना की थी।
समय के साथ सुविधाएं कम होती चली गईं
शुरुआती दिनों में यहां चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति, आवश्यक दवाओं, भोजन, आरओ का शुद्ध पानी, टेलीविजन और एसी जैसी सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। लेकिन समय के साथ सुविधाएं कम होती चली गईं।
इस समय जिले के युवा तेजी से स्मैक, गांजा, चरस, अफीम, बोनफिक्स और सॉल्यूशन जैसे नशीले पदार्थों के सेवन की गिरफ्त में आ रहे हैं। ऐसे दर्जनों मरीज नशा मुक्ति केंद्र पहुंच रहे हैं, लेकिन समुचित इलाज और भर्ती की व्यवस्था नहीं होने से मरीजों और उनके स्वजन को निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
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9 साल में सिर्फ 8 मरीज भर्ती
आंकड़े बताते हैं कि पिछले नौ वर्षों में केवल आठ मरीजों को ही यहां भर्ती किया गया है। जबकि प्रतिदिन औसतन 15 मरीज नशे की लत से मुक्ति की उम्मीद लेकर केंद्र पहुंचते हैं। इनमें शराब के साथ-साथ अन्य मादक पदार्थों के आदी लोग हैं। संसाधनों के अभाव में अधिकांश मरीजों की केवल काउंसलिंग की जाती है, जबकि गंभीर स्थिति वाले मरीजों को बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की लत केवल सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि गंभीर चिकित्सकीय और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारी है। ऐसे में बढ़ते नशे के प्रचलन को देखते हुए जिले के नशा मुक्ति केंद्र को विशेषज्ञ चिकित्सकों, पर्याप्त दवाओं और भर्ती की सुविधाओं से सुसज्जित करना समय की बड़ी जरूरत है। तभी नशे की गिरफ्त में फंसे युवाओं को नई जिंदगी देने का उद्देश्य पूरा हो सकेगा।
केंद्र में मरीजों को भर्ती कर उपचार देने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मरीजों की सिर्फ काउंसलिंग की जाती है, जरूरत पड़ने पर पटना रेफर किया जाता है। प्रत्येक मंगलवार और गुरुवार को मेंटल हेल्थ में डिप्लोमा प्राप्त चिकित्सक द्वारा ओपीडी सेवा दी जाती है, शेष दिन में इलाज और परामर्श देता हूं। - डॉ. अरविंद कुमार, नोडल पदाधिकारी, नशा मुक्ति केंद्र, अरवल