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असम विमान हादसे में शहीद हुए लेफ्टिनेंट शुभम कुमार पंचतत्व में विलीन, अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब  

Published: Mon, 15 Jun 2026 01:24 AM (IST)

असम विमान हादसे में शहीद हुए भारतीय वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार का पार्थिव शरीर जहानाबाद के बनवरिया गांव ...और पढ़ें

अंतिम यात्रा में शामिल हुए लोग। फोटो जागरण

अंतिम यात्रा में शामिल हुए लोग। फोटो जागरण

HighLights

  1. लेफ्टिनेंट शुभम कुमार का पार्थिव शरीर जहानाबाद पहुंचा।

  2. असम विमान हादसे में वीरगति को प्राप्त हुए थे शुभम।

  3. हजारों की भीड़ ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई।

जागरण संवाददाता, जहानाबाद। देश सेवा के दौरान असम में विमान हादसे में वीर गति को प्राप्त हुए हुलासगंज के बनवरिया गांव के वीर सपूत भारतीय वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार का पार्थिव शरीर रविवार को गांव पहुंचा।

पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। अंतिम विदाई देने के लिए जहानाबाद से ही बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी, इस दौरान भारत माता की जय के नारे गूंज रहे थे।

परिवार के लोग निःशब्द थे। उनकी आंखों से आंसू नहीं थम पा रहे थे। पिता अमरेंद्र शर्मा उर्फ पप्पू शर्मा , माता पूनम देवी व छोटे भाई सत्यम का रो-रोकर हाल बेहाल था।

जिले की सीमा से लेकर गांव तक सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग खड़े होकर वीर सपूत को नमन कर रहे थे। हर कोई बलिदान सपुत की एक झलक पाने और उन्हें अंतिम विदाई देने को आतुर दिखे।

गगनभेदी नारों से गूंज उठा इलाका 

शाम करीब चार बजे के बाद विशेष वाहन से बलिदान जवान का पार्थिव शरीर जिले की सीमा में प्रवेश किया। शहर के अरवल मोड़ के समीप बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने 'भारत माता की जय' और 'वीर शुभम अमर रहें' के नारों के बीच पुष्प वर्षा कर उनका नमन किया।

इसके बाद काको प्रखंड के मनियामा, घोसी, हुलासगंज सहित कई स्थानों पर लोगों ने सड़क किनारे खड़े होकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। जगह-जगह ग्रामीणों ने सिर झुकाकर वीर जवान के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।

पूरे मार्ग में देशभक्ति और सम्मान का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। जैसे ही पार्थिव शरीर बनवरिया पहुंचा, पूरा गांव शोक में डूब गया। अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

एक ओर वीर शुभम अमर रहें के गगनभेदी नारे गूंज रहे थे तो दूसरी ओर स्वजन के करुण क्रंदन से माहौल अत्यंत गमगीन हो उठा। मां, पिता और अन्य स्वजन अपने लाल को अंतिम बार देखकर बेसुध हो गए।

गांव के लोगों की आंखें भी नम थीं। वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि शुभम कुमार केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे जिले और देश के गौरव थे।

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