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    अरवल में बारिश और उमस की मार: आसमान पर पहुंचे हरी सब्जियों के दाम, धनिया पत्ता ₹280 और अदरक ₹200 किलो

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 03:24 PM (IST)

    अरवल जिले में लगातार बारिश और उमस के कारण हरी सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। खेतों में जलभराव और मंडियों तक कम आवक से धनिया ₹280 और अदरक ₹200 प्रति ...और पढ़ें

    आसमान पर पहुंचे हरी सब्जियों के दाम

    आसमान पर पहुंचे हरी सब्जियों के दाम

    HighLights

    1. लगातार बारिश और उमस से सब्जियों की कीमतें बढ़ीं।

    2. खेतों में जलभराव, मंडियों तक कम पहुंच मुख्य कारण।

    3. धनिया ₹280, अदरक ₹200 किलो, गृहिणियों का बजट प्रभावित।

    संवाद सहयोगी, कलेर (अरवल)। जिले में लगातार हो रही वर्षा और बढ़ी उमस का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। खेतों में जलभराव और मंडियों तक सब्जियों की कम आवक के कारण हरी सब्जियों के दामों में तेजी देखने को मिल रही है। 

    पिछले कुछ सप्ताह की तुलना में कई सब्जियां 10 से 30 रुपये प्रति किलो तक महंगी हो गई हैं, जिससे गृहिणियों की चिंता बढ़ गई है। 

    मंडियों तक पर्याप्त मात्रा में सब्जियां नहीं पहुंच रही

    स्थानीय सब्जी कारोबारी आदित्य साव, राजेश साव, लाला साव और संजय साव ने बताया कि लगातार बारिश के कारण खेतों से समय पर सब्जियों की तुड़ाई नहीं हो पा रही है। कई ग्रामीण इलाकों में जलभराव और परिवहन की समस्या के कारण मंडियों तक पर्याप्त मात्रा में सब्जियां नहीं पहुंच रही हैं। 

    मांग अधिक और आपूर्ति कम होने से कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यदि मौसम जल्द सामान्य नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में दाम और बढ़ सकते हैं।

    बढ़े हुए सब्जियों के दाम

    वर्तमान में बाजार में कुंदरी 20 रुपये प्रति किलो, भिंडी 30 रुपये, परवल 40 रुपये, नेनुआ 40 रुपये, टमाटर 40 रुपये, बैंगन 40 रुपये, करेला 40 रुपये, बंदगोभी 50 रुपये, गाजर 50 रुपये, खीरा 60 रुपये और पालक 60 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। 

    वहीं हरी मिर्च 80 रुपये, शिमला मिर्च 150 रुपये, अदरक 200 रुपये तथा धनिया पत्ता 280 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसके अलावा कद्दू 30 रुपये प्रति पीस, फूलगोभी 60 रुपये प्रति पीस और कच्चा केला 40 रुपये प्रति दर्जन की दर से बिक रहा है।

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    गृहिणियों का कहना है कि पहले जितने पैसे में कई प्रकार की सब्जियां खरीदी जाती थी, अब उतने में सीमित खरीदारी ही संभव हो रही है। इससे रसोई का मासिक बजट लगातार बढ़ता जा रहा है। बारिश की मार से सब्जी बाजार और आम उपभोक्ताओं की जेब दोनों पर महंगाई का असर पड़ रहा है।