बिहार के जमुई में क्रूड ऑयल की चोरी से हड़कंप, पाइपलाइन में वाल्व लगाकर हो रही सेंधमारी
बरौनी-हल्दिया कच्चा तेल पाइपलाइन की सुरक्षा पर फिर सवाल उठे हैं, झाझा के बाराजोर में सेंधमारी की घटना सामने आई ...और पढ़ें

क्रूड ऑयल की पाइपलाइन। फाइल फोटो
HighLights
झाझा के बाराजोर में बरौनी-हल्दिया पाइपलाइन में सेंधमारी।
तेल चोरी की घटनाओं से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल।
पुलिस के लिए मुख्य आरोपितों को पकड़ना चुनौती।
संवाद सूत्र, बोड़वा (जमुई)। बरौनी-हल्दिया कच्चा तेल पाइपलाइन की सुरक्षा-व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। झाझा थाना क्षेत्र के बाराजोर में अपराधियों द्वारा पाइपलाइन में सेंधमारी किए जाने की सूचना सामने आई है।
महत्वपूर्ण पेट्रोलियम संपत्ति को निशाना बनाए जाने की इस घटना ने पुलिस और संबंधित विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पाइपलाइन से तेल चोरी की घटनाएं क्षेत्र में पहले भी सामने आती रही हैं। बाराजोर के अलावा सितोचक, नरगंजो और रजला की धीपल पहाड़ी जैसे दुर्गम इलाकों में भी पाइपलाइन को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है।
लगातार सामने आ रही घटनाओं के बावजूद मुख्य आरोपितों तक पुलिस की पहुंच नहीं बन पाना सुरक्षा-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
बताया जाता है कि इसी वर्ष आठ मार्च को सितोचक के समीप पाइपलाइन में वाल्व लगाकर कच्चा तेल चोरी किए जाने का मामला सामने आया था।
इस संबंध में प्रबंधक शिव कुमार दुबे ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इससे पहले पिछले वर्ष एक नवंबर को धीपल पहाड़ी के जंगलों में भी पाइपलाइन में सेंधमारी की घटना सामने आई थी।
चार महीने में छह बार हुई थी चोरी
वर्ष 2020 में सितोचक के पास महज चार महीने के भीतर छह बार तेल चोरी की वारदात सामने आने की बात कही जाती है। 06 मार्च 2020 को पाइपलाइन में दबाव कम होने पर डीजीआर टीम जांच के लिए पहुंची थी।
जांच के दौरान जमीन के नीचे 18 इंच चौड़ी मुख्य पाइपलाइन में 12.5 इंच का डबल लीवर वाल्व लगा मिला था। इससे बड़े पैमाने पर तेल चोरी की आशंका सामने आई थी।
प्रेशर गिरते ही कंट्रोल रूम में मिल जाता है संकेत
पाइपलाइन से कच्चा तेल निकाले जाने पर बरौनी कंट्रोल रूम में दबाव कम होने का संकेत मिलता है। इसके आधार पर संबंधित अधिकारी जांच शुरू करते हैं। बावजूद इसके बार-बार सेंधमारी की घटनाएं सामने आना सुरक्षा-व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्गम इलाकों में नियमित निगरानी और प्रभावी कार्रवाई के बिना इस तरह की घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाना मुश्किल है।
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