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    जमुई: चकाई में बिना सर्वे राशन कार्ड से काट दिए 5000 गरीबों के नाम, जुड़वाने के नाम पर हो रही अवैध वसूली

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 04:12 PM (IST)

    जमुई के चकाई प्रखंड में आपूर्ति विभाग की लापरवाही से 5000 गरीब लोगों के राशन कार्ड से नाम काट दिए गए हैं। नाम दोबारा जुड़वाने के लिए बिचौलिये 1700 से ...और पढ़ें

    राशन कार्ड के नाम पर वसूली। फोटो जागरण

    राशन कार्ड के नाम पर वसूली। फोटो जागरण

    HighLights

    1. चकाई में 5000 गरीब लोगों के राशन कार्ड से नाम कटे।

    2. नाम जुड़वाने बिचौलिये कर रहे 1700-3000 रुपये की अवैध वसूली।

    3. पात्र लोगों को राशन नहीं मिल रहा, अधिकारी दे रहे टालमटोल जवाब।

    संवाद सूत्र, चकाई (जमुई)। प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में आपूर्ति विभाग की भारी लापरवाही सामने आई है। यहां दलित, महादलित, गरीब किसान और मजदूर वर्ग के लगभग 5000 लोगों के नाम राशन कार्ड से मनमाने ढंग से काट दिए गए हैं।

    नियमतः उन लोगों के नाम काटे जाने थे जिनका लंबे समय से केवाइसी नहीं हुआ था या जो क्षेत्र से बाहर रह रहे थे, लेकिन आपूर्ति कार्यालय के कर्मियों ने बिना कोई जमीनी सर्वे किए ही सैकड़ों पात्र और गरीब मजदूरों को राशन से वंचित कर दिया।

    सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इस लापरवाही की भेंट 12 से 14 वर्ष की आयु के वे बच्चे और मजदूर भी चढ़ गए हैं जो जीवित हैं और गांव में ही रहते हैं। नाम कटने के बाद अब ये गरीब अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

    सक्रिय हुए बिचौलिये, हो रही मनमानी वसूली

    सिस्टम की इस अव्यवस्था का फायदा उठाकर चकाई में दर्जनों बिचौलिये सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, राशन कार्ड में नाम दोबारा जुड़वाने के लिए प्रति व्यक्ति 1700 से लेकर 3000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है।

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    मरही निवासी खागो दास और बासुदेव दास ने बताया कि बिचौलियों द्वारा नाम जोड़ने के लिए 1700 रुपये की मांग की जा रही है। वहीं, करही की शुभा देवी और गिरधारी तूरी ने बताया कि उन्होंने राशन कार्ड के लिए बिचौलियों को 3000 रुपये दे दिए हैं।

    सिस्टम की लाचारी : कार्ड बना, पर अनाज नदारद

    एक ओर जिलाधिकारी हर रोज नए राशन कार्ड बनवाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभागीय कर्मियों की मनमानी से हजारों गरीब भुखमरी की कगार पर हैं। इतना ही नहीं, प्रखंड में सैकड़ों ऐसे लोग भी हैं, जिनका राशन कार्ड छह से आठ महीने पहले बन चुका है, लेकिन उन्हें अब तक एक दाना अनाज नहीं मिला है।

    पीड़ित जब डीलर के पास जाते हैं तो बताया जाता है कि पीओएस मशीन में उनका नाम नहीं दिख रहा है। वहीं, आपूर्ति पदाधिकारी के पास शिकायत लेकर जाने पर रटा-रटाया जवाब मिलता है कि ‘सूची हैदराबाद भेज दी गई है, सर्वर वहीं से ठीक होगा।’ यह कहकर जिम्मेदार अधिकारी अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।

    चकाई प्रखंड में 5000 से अधिक लोगों का नाम कटा है। यह किस वजह से कटा और इसके जिम्मेवार कौन हैं, यह उच्च अधिकारी ही बता पाएंगे। मेरी अपील है कि पीड़ित लोग बिचौलियों के चक्कर में न पड़ें और आवेदन भरकर सीधे प्रखंड आपूर्ति कार्यालय में जमा करें। कार्यालय द्वारा निःशुल्क राशन कार्ड बनाया जा रहा है। - मुकेश कुमार, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, चकाई