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    जमुई में ऊंची भूमि बनेगी ‘कामधेनु’, नाशपाती और आडू की खेती से बढ़ेगी आमदनी, आप भी करें पैदावार

    Updated: Thu, 05 Feb 2026 01:36 PM (IST)

    जमुई के किसानों के लिए अच्छी खबर है, जहां ऊंची भूमि पर अब नाशपाती और आडू की खेती होगी। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने जमुई को इसके लिए चुना है। सर् ...और पढ़ें

    नाशपाती और आडू की खेती से क‍िसान होंगे समृद्ध

    नाशपाती और आडू की खेती से क‍िसान होंगे समृद्ध

    HighLights

    1. जमुई में नाशपाती और आडू की खेती से किसानों को लाभ।

    2. बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने जमुई को खेती के लिए चुना।

    3. कम लागत में अधिक मुनाफा, आर्थिक स्थिति में सुधार।

    संवाद सहयोगी, जमुई। जमुई के किसानों के लिए अच्छी खबर है। जिले के ऊंची प्रकृति वाले खेत, जहां पानी की कमी और ठंडी जलवायु के कारण खेती चुनौतीपूर्ण होती थी, अब नाशपाती और आडू की खेती से “कामधेनु” साबित होंगे। जमुई में कुल खेती योग्य जमीन का लगभग 40 प्रतिशत ऊंची प्रकृति का खेत है। सर्दियों में तापमान पांच डिग्री तक गिर जाता है, जो इन फलों की खेती के लिए अनुकूल है।

    बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने राज्य स्तर पर जमुई को आडू और नाशपाती की खेती के लिए चयनित किया है। कुलपति ने बताया कि पर्याप्त पौधा कृषि विज्ञान केंद्र जमुई को उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकेंगे। शुरुआती चरण में आडू के हाइब्रिड किस्म प्रभात, प्रताप और खुरम तथा नाशपाती के पत्थर नख, पंजाब गोल्ड और पंजाब नख प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे।

    • भागलपुर के बाद जमुई में होगी नाशपाती और आडू की खेती
    • बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर ने किया इसकी खेती के लिए किया जिले का चयन
    • जमुई के ऊंची भूमि वाले खेतों में नाशपाती और आडू की खेती से किसानों को आर्थिक लाभ
    • जिले के ऊंची प्रकृति वाले खेत के लिए बनेगा कामधेनु
    • पूरे बिहार में इसकी खेती के लिए भागलपुर के बाद जमुई का हुआ है चयन
    • आडू और नाशपाती का फल अधिकतम 45 डिग्री तक तापमान सहन कर सकता है।

    कृषि विज्ञान केंद्र जमुई के प्रमुख डा. सुधीर कुमार ने बताया कि आडू और नाशपाती के पौधों में दिसंबर से जनवरी तक फूल आते हैं। इस दौरान न्यूनतम तापमान तीन से दस डिग्री के बीच होता है, जो फलों के विकास के लिए अनुकूल है। फूल लगने के तीन से चार माह के भीतर आडू और नाशपाती के फल तैयार हो जाते हैं।

    हाइब्रिड प्रजातियों के लिए 150 से 300 घंटे की चिलिंग की आवश्यकता होती है, जो जमुई की जलवायु में संभव है। इस पहल से किसानों को नए फलों की खेती कर आर्थिक लाभ उठाने का अवसर मिलेगा। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि नाशपाती और आडू की खेती जिले में धीरे-धीरे बड़े पैमाने पर फैल सकती है और जमुई को फलोत्पादन में प्रमुख जिले के रूप में उभारा जा सकता है।

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    भागलपुर के बाद जमुई जिले की जलवायु को इन दोनों फलों की खेती के लिए अनुकूल माना गया है। क्योंकि इसके पेड़ की जड़ में पानी जमा नहीं होना चाहिए और यह ऊंची प्रकृति वाले खेत में ही संभव है। इस तरह का खेत जमुई जिले में पर्याप्त है।

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    डा डीआर सिंह, कुलपति, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर