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    जमुई रेल हादसा: 58 KM की रफ्तार में लगा झटका, 561 मीटर आगे जाकर रुकी मालगाड़ी; DRM ने इंजनों का किया निरीक्षण

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 10:52 PM (GMT+05:30)

    Jamui Rail Accident: सिमुलतला-लाहबन के बीच 27 दिसंबर की रात हुई मालगाड़ी दुर्घटना की तकनीकी जांच तेज हो गई है। आसनसोल रेल मंडल के डीआरएम सुधीर कुमार श ...और पढ़ें

    डीआरएम ने किया इंजनों का निरीक्षण। (जागरण)

    डीआरएम ने किया इंजनों का निरीक्षण। (जागरण)

    HighLights

    1. डीआरएम ने सिमुलतला मालगाड़ी दुर्घटनास्थल का निरीक्षण किया।

    2. दुर्घटनाग्रस्त इंजनों की तकनीकी जांच तेज की गई।

    3. यांत्रिक खराबी और ट्रैक छेड़छाड़ की जांच जारी।

    संवाद सूत्र, सिमुलतला(जमुई)। लाहबन और सिमुलतला के बीच 27 दिसंबर की रात हुई मालगाड़ी दुर्घटना की तकनीकी जांच अब और तेज कर दी गई है।

    इसी क्रम में गुरुवार को आसनसोल रेल मंडल के नवनियुक्त मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) सुधीर कुमार शर्मा ने घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया।

    घटनास्थल का जायजा लेने के बाद डीआरएम सिमुलतला स्टेशन पहुंचे, जहां दुर्घटनाग्रस्त मालगाड़ी के दोनों इंजन खड़े किए गए हैं। उन्होंने तकनीकी अधिकारियों की टीम के साथ इंजन के प्रत्येक पहलू की बारीकी से जांच की और हादसे के समय इंजन की स्थिति को समझने का प्रयास किया।

    जांच में सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त मालगाड़ी को दो इलेक्ट्रिक इंजन चला रहे थे। इनमें आगे का इंजन चालू अवस्था (लाइव) में था, जबकि पीछे का इंजन बंद अवस्था (डेड) में था, जिसे टो कर ले जाया जा रहा था। दोनों इंजनों का संचालन आसनसोल मुख्यालय के लोको पायलट कमलेश कुमार और सहायक लोको पायलट अभय कुमार कर रहे थे।

    सूत्रों के अनुसार, संयुक्त जांच नोट में यह स्पष्ट हुआ है कि हादसे के समय ट्रेन की गति लगभग 58 किलोमीटर प्रति घंटा थी। जैसे ही ट्रेन किमी सं. 344/15-17 (पुल सं. 676) के पास पहुंची, इंजन में तेज झटका महसूस किया गया। इसके बाद लोको पायलट ने रात 11:08 बजे तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाया, लेकिन तेज गति और पीछे के वैगनों के बेपटरी होने के कारण ट्रेन लगभग 561 मीटर आगे जाकर रुकी।

    डीआरएम द्वारा स्वयं इंजनों का निरीक्षण किया जाना इस बात का संकेत है कि रेलवे प्रशासन इस मामले में यांत्रिक खराबी (मैकेनिकल फेलियर) और ट्रैक से छेड़छाड़, दोनों संभावनाओं को गंभीरता से जांच रहा है। इंजनों के पहियों और निचले हिस्सों की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि बेपटरी की शुरुआत इंजन से हुई या पीछे के डिब्बों से।

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