राजनीतिक उत्साह में सुरक्षा नियम भूले, जमुई में वंदे भारत एक्सप्रेस के स्वागत के दौरान रेलवे ट्रैक में उमड़ी भीड़
जमुई रेलवे स्टेशन पर पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस के स्वागत समारोह के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई। राजनीतिक उत्साह में कई लोग ओवरब्रिज के ...और पढ़ें
HighLights
वंदे भारत स्वागत में जमुई स्टेशन पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी।
कई लोग ओवरब्रिज छोड़ सीधे रेलवे ट्रैक पार करते दिखे।
यात्रियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल।
पंचायत सूत्र, मलयपुर (बरहट)। जमुई रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस के ठहराव को लेकर जहां उत्सव का माहौल था, वहीं सुरक्षा नियमों की अनदेखी भी देखने को मिली। ट्रेन के स्वागत समारोह के दौरान स्टेशन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुलती नजर आई।
ट्रेन के आगमन को लेकर दानापुर रेल मंडल के निर्देश पर स्टेशन परिसर और प्लेटफार्म संख्या 01 एवं 02 पर वाणिज्य विभाग के अधिकारियों और मुख्य टिकट निरीक्षकों (टीटीई) की विशेष तैनाती की गई थी। रेलवे कर्मी वीआईपी मूवमेंट और यात्रियों की सुविधा को लेकर लगातार सक्रिय दिखे। टिकट जांच और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों की मुस्तैदी भी दिखाई दी, लेकिन प्लेटफार्म के दूसरी ओर का दृश्य अलग कहानी बयां कर रहा था।
राजनीतिक उत्साह में सुरक्षा नियम भूले गए
वंदे भारत एक्सप्रेस के स्टेशन पहुंचते ही स्वागत को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता उत्साह में सुरक्षा मानकों को भूल गए। प्लेटफार्म संख्या 02 तक पहुंचने की जल्दबाजी में कई लोग ओवरब्रिज का इस्तेमाल करने की बजाय सीधे रेलवे ट्रैक पार करते नजर आए। इस दौरान आरपीएफ और जीआरपी के जवान भीड़ को नियंत्रित करने में मशक्कत करते दिखे।
स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने इस अव्यवस्था पर नाराजगी जताई। हावड़ा जाने वाले यात्री दिलमोहन कुमार ने कहा कि रेलवे आम लोगों को पटरी पार करने पर जुर्माना और जेल का प्रावधान बताता है, लेकिन नेताओं और कार्यकर्ताओं के सामने नियम शिथिल पड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में खुलेआम लोग ट्रैक पार कर रहे थे।
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जागरूकता अभियान की प्रभावशीलता पर उठे सवाल
रेलवे समय-समय पर ‘पटरी पार न करें’ और ‘ओवरब्रिज का प्रयोग करें’ जैसे जागरूकता अभियान चलाता है। लेकिन शुक्रवार को जमुई स्टेशन पर दिखे हालात ने इन अभियानों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए। ट्रेन की गति स्टेशन पर धीमी थी, जिससे कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
स्थानीय रेल अधिकारियों से इस संबंध में बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने भीड़ का हवाला देते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। यात्रियों और स्थानीय लोगों का कहना था कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी केवल ट्रेन के स्वागत समारोह तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि दिन-प्रतिदिन की आम यात्रा में भी यह नियम लागू होने चाहिए।
भविष्य में सुरक्षा के उपाय जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेन का ठहराव छोटे शहरों के लिए गर्व की बात है, लेकिन इसके साथ ही सुरक्षा नियमों की सख्ती भी जरूरी है। प्लेटफार्म पर नियंत्रण और भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती, बैरिकेडिंग और मार्गदर्शन की व्यवस्था समय पर की जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में रेलवे प्रशासन सुरक्षा नियमों पर ध्यान देगा और ऐसे आयोजनों में नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं, यात्री भी यह अपेक्षा करते हैं कि राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों में भी नियमों को सभी के लिए समान रूप से लागू किया जाए।