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जमुई: फाइलों में कैद हुआ फैसला, 2 साल बाद भी 2 लाख बच्चों के भविष्य पर लटकी सुस्ती की तलवार

Published: Fri, 14 Aug 2026 02:30 PM (IST)

बिहार में सिमुलतला आवासीय विद्यालय के लिए प्राथमिक विद्यालयों के मेधावी छात्रों को प्रवेश परीक्षा से जोड़ने का 2022 का निर्णय दो साल बाद भी लागू नहीं हो सका है।

सिमुलतला आवासीय विद्यालय

सिमुलतला आवासीय विद्यालय

HighLights

  1. सिमुलतला प्रवेश परीक्षा का 2022 का निर्णय अब तक लागू नहीं।

  2. बिहार के प्राथमिक विद्यालयों के दो लाख छात्रों का भविष्य प्रभावित।

  3. ग्रामीण मेधा को मुख्यधारा से जोड़ने की योजना अधर में।

संवाद सूत्र, सिमुलतला (जमुई)। बिहार में ग्रामीण क्षेत्र की मेधा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से स्थापित सिमुलतला आवासीय विद्यालय को लेकर वर्ष 2022 में लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय अब तक धरातल पर नहीं उतर सका है।

शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय की पांचवीं कक्षा के पांच मेधावी विद्यार्थियों को सिमुलतला आवासीय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा का आवेदन भरवाने का निर्णय लिया गया था। दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद इस निर्णय के क्रियान्वयन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

सिमुलतला आवासीय विद्यालय के लिए 120 विद्यार्थियों का होना था चयन

02 अगस्त 2022 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई थी। इसमें राज्य के करीब 44 हजार प्राथमिक विद्यालयों से लगभग 2.20 लाख मेधावी विद्यार्थियों को प्रवेश परीक्षा की प्रक्रिया से जोड़ने की परिकल्पना की गई थी।

इससे सिमुलतला आवासीय विद्यालय के लिए 120 विद्यार्थियों का व्यापक और पारदर्शी चयन करने के साथ प्रखंड स्तर के अन्य आदर्श विद्यालयों के लिए भी मेधा सूची तैयार करने में सहायता मिल सकती थी।

ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को मुख्यधारा से जोड़ना था उद्देश्य

सिमुलतला शिक्षा सोसाइटी के मूल प्रस्तावक और संस्थापक सदस्य कर्नल बीबी सिंह ने इस निर्णय के अब तक लागू नहीं होने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में शिक्षा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह, बोर्ड के अधिकारियों और संस्थापक सदस्यों की मौजूदगी में यह निर्णय लिया गया था।

इसका उद्देश्य राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को सिमुलतला की मुख्यधारा से जोड़ना था। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर अपेक्षित पहल नहीं होने से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।

कर्नल सिंह के अनुसार, सिमुलतला आवासीय विद्यालय की मूल परिकल्पना नेतरहाट की तर्ज पर की गई थी और इसे राज्यपाल के अधीन स्वायत्त रूप से संचालित करने की योजना थी।

उन्होंने विद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था और स्वायत्तता को लेकर भी चिंता जताई। शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय होने के बावजूद इसे अब तक लागू नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

इधर, सिमुलतला आवासीय विद्यालय में सत्र 2027-28 के लिए कक्षा छह में नामांकन को लेकर आवेदन प्रक्रिया 03 से 18 अगस्त तक चल रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिक्षा विभाग पुराने निर्णय को लागू करने की दिशा में आगामी सत्र से क्या कदम उठाता है।