Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    भभुआ नगर परिषद सभापति विकास तिवारी अयोग्य घोषित, राज्य निर्वाचन आयोग का बड़ा फैसला

    Updated: Wed, 29 Apr 2026 02:50 PM (IST)

    भभुआ नगर परिषद के सभापति विकास कुमार तिवारी को राज्य निर्वाचन आयोग ने तथ्य छिपाने के आरोप में अयोग्य घोषित कर दिया है। उन पर दो से अधिक संतान होने की ...और पढ़ें

    भभुआ नगर परिषद सभापति विकास तिवारी अयोग्य घोषित

    भभुआ नगर परिषद सभापति विकास तिवारी अयोग्य घोषित

    HighLights

    1. सभापति विकास तिवारी तथ्य छिपाने पर अयोग्य घोषित।

    2. राज्य निर्वाचन आयोग ने सभापति का पद रिक्त किया।

    3. गलत हलफनामा देने पर विधिक कार्रवाई का आदेश।

    जागरण संवाददाता, भभुआ। भभुआ नगर परिषद के सभापति का पद बुधवार को रिक्त हो गया। राज्य निर्वाचन आयोग ने तथ्य छिपाने पर सभापति को अयोग्य घोषित कर दिया है। साथ ही जिलाधिकारी कैमूर को यह आदेश दिया है कि सभापति विकास कुमार तिवारी के विरुद्ध गलत हलफनामा एवं तथ्य छिपाने के लिए विधिक कार्रवाई कर चार सप्ताह के अंदर अवगत कराएं।

    बता दें कि भभुआ नगर के पूर्व सभापति जैनेंद्र कुमार आर्य ने 4.4.2008 के बाद दो से अधिक जीवित संतान के होने की जानकारी देते हुए सभापति विकास कुमार तिवारी के विरुद्ध राज्य निर्वाचन आयोग में वर्ष 2025 में शिकायत की थी।

    उनके द्वारा दावा किया गया कि चार संतानों में कम से कम एक संतान की जन्म तिथि 4.4.2008 के बाद की है। हालांकि, जिला निर्वाचन पदाधिकारी के प्रतिवेदन के अनुसार तीन संतानों की जन्म तिथि 4.4.2008 के बाद की है।

    वाद की सुनवाई के बाद 5.1.2026 को जिलाधिकारी कैमूर द्वारा सत्यापन सह जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। जिसमें विकास कुमार तिवारी की संतानों में दो पुत्र व दो पुत्रियों के बारे में जानकारी दी गई है, जबकि स्कूल से उपलब्ध कराए गए जन्मतिथि से संबंधित साक्ष्य में विकास तिवारी के तीन बच्चों की जन्म तिथि 4.4.2008 के बाद है।

    खबरें और भी

    वाद की सुनवाई के दौरान विकास कुमार तिवारी की ओर से उपलब्ध कराए गए साक्ष्य व तथ्यों को आयोग ने अयोग्य बता दिया है। साथ ही तथ्यों को छिपाकर गलत शपथ पत्र के आधार पर मुख्य पार्षद का चुनाव लड़े और निर्वाचित हुए।

    आयोग ने विकास कुमार तिवारी को अयोग्य मानते हुए सभापति के पद से मुक्त कर दिया है। साथ ही नगर परिषद भभुआ के सभापति का पद रिक्त कर दिया है।

    जिलाधिकारी को यह आदेश दिया है कि वे प्राप्त शक्तियों का प्रयोग कर नियमानुसार विधिक कार्रवाई करें और कृत कार्रवाई से चार सप्ताह में आयोग को अवगत कराएं। उधर बुधवार को इस बात की सूचना मिलने से लोगों के बीच खूब चर्चा रही।