अब बिहार में घर बैठे हो रही जमीन की रजिस्ट्री, बुजुर्ग और अस्वस्थ लोगों के लिए बड़ी राहत
बिहार में गंभीर रूप से बीमार, बुजुर्ग या चलने-फिरने में असमर्थ लोग अब घर बैठे जमीन की रजिस्ट्री करा सकते हैं। रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 38 के ...और पढ़ें

निबंधन कार्यालय नहीं, अधिकारी पहुंचते हैं लाभुक के पास
HighLights
बीमार, बुजुर्ग घर बैठे करा सकते हैं जमीन रजिस्ट्री।
रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 की धारा 38 के तहत सुविधा।
अधिकारी घर आकर पूरी करते हैं निबंधन प्रक्रिया।
जागरण संवाददाता, भभुआ(कैमूर)। जमीन की रजिस्ट्री का नाम आते ही लोगों के मन में निबंधन कार्यालय के चक्कर और लंबी प्रक्रिया की तस्वीर उभरती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि गंभीर रूप से बीमार, बुजुर्ग या चलने-फिरने में असमर्थ लोग घर बैठे भी रजिस्ट्री करा सकते हैं।
रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 38 के तहत यह विशेष सुविधा पहले से लागू है। इस व्यवस्था के तहत अधिकारी लाभुक के घर, अस्पताल या निवास स्थान पर पहुंचते हैं।
वहीं पर दस्तावेजों की जांच से लेकर बायोमेट्रिक सत्यापन तक की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इससे जरूरतमंद लोगों को बड़ी राहत मिल रही है।
निबंधन कार्यालय नहीं, अधिकारी पहुंचते हैं लाभुक के पास
सामान्य परिस्थितियों में रजिस्ट्री के लिए खरीदार, विक्रेता और गवाहों को कार्यालय जाना पड़ता है। लेकिन बीमारी या शारीरिक अक्षमता की स्थिति में अलग व्यवस्था उपलब्ध है।
इसके लिए संबंधित व्यक्ति को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन देना होता है। आवेदन की जांच और सत्यापन के बाद अधिकारी लाभुक के घर पहुंचते हैं।
वहीं पर पूरी निबंधन प्रक्रिया कानूनी रूप से पूरी कराई जाती है। यह व्यवस्था बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है।
घर पर ही पूरी होती है बायोमेट्रिक और दस्तावेजी प्रक्रिया
अधिकारी संबंधित व्यक्ति की पहचान और सहमति की पुष्टि करते हैं। यह सुनिश्चित किया जाता है कि दस्तावेज का निष्पादन स्वेच्छा से हो रहा है।
इसके बाद हस्ताक्षर, अंगूठे का निशान और फोटो लिया जाता है। बायोमेट्रिक सत्यापन और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं भी वहीं पूरी की जाती हैं।
घर पर हुई रजिस्ट्री भी कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य होती है। इसकी वैधता कार्यालय में की गई रजिस्ट्री के समान होती है।
केवल वास्तविक जरूरतमंदों को ही मिलता है लाभ
निबंधन विभाग के अनुसार यह सुविधा सभी के लिए उपलब्ध नहीं है। केवल वही लोग इसका लाभ उठा सकते हैं जो वास्तव में कार्यालय आने में असमर्थ हैं।
आवेदन मिलने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की जाती है। संबंधित व्यक्ति की स्थिति का सत्यापन भी कराया जाता है।
जांच में संतुष्ट होने के बाद ही घर जाकर रजिस्ट्री की अनुमति दी जाती है। इसका उद्देश्य सुविधा के दुरुपयोग को रोकना है।
दो तरह की सुविधा, अलग-अलग तय है शुल्क
यदि दस्तावेज पहले से कार्यालय में जांच लिए गए हों तो अलग शुल्क लगता है। ऐसी स्थिति में केवल अंतिम प्रक्रिया के लिए अधिकारी को घर जाना होता है।
इसके लिए एक हजार रुपये का अतिरिक्त शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया घर पर कराने के लिए सात हजार रुपये शुल्क देना होता है।
इस दौरान आवश्यक उपकरणों के साथ मिनी निबंधन कार्यालय लाभुक के घर पहुंचता है। वहीं पर दस्तावेज जांच से लेकर बायोमेट्रिक तक की प्रक्रिया पूरी होती है।
हर साल बढ़ रहा है इस सुविधा का लाभ लेने वालों का आंकड़ा
भभुआ अवर निबंधन कार्यालय के अनुसार हर वर्ष कई लोग इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। वर्ष 2022 में 14 लोगों की घर जाकर रजिस्ट्री कराई गई थी।
वर्ष 2023 में 11 और 2024 में 7 लोगों को इसका लाभ मिला। वर्ष 2025 में सबसे अधिक 20 लोगों की रजिस्ट्री उनके घर पर हुई।
वहीं वर्ष 2026 में अब तक 9 मामलों में यह सुविधा दी जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि आगे भी जरूरतमंदों को इसका लाभ मिलता रहेगा।
कहते है अवर निबंधक पदाधिकारी
जो व्यक्ति निबंधन कार्यालय आने-जाने में असमर्थ हैं, उनके लिए कानून में विशेष व्यवस्था है। आवेदन और निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद मिनी निबंधन कार्यालय आवश्यक उपकरणों के साथ लाभुक के स्थान पर पहुंचकर पूरी प्रक्रिया पूरी करता है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 38 के तहत वर्षों से लागू है और आज भी जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ दिया जा रहा है।
राकेश कुमार, अवर निबंधक