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    कैमूर में आवारा कुत्तों का कहर: 6 महीने में 5600 लोगों को काटा, बच्चों का घर से निकलना हुआ मुहाल

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 02:49 PM (IST)

    कैमूर जिले में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है, पिछले छह महीनों में 5600 लोग इनके काटने से घायल हुए हैं। लोग सुबह की सैर, स्कूल और बाजार जाने में असु ...और पढ़ें

    कैमूर में आवारा कुत्तों का खौफ, छह महीने में हजारों लोग हुए शिकार

    कैमूर में आवारा कुत्तों का खौफ, छह महीने में हजारों लोग हुए शिकार

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    जागरण संवाददाता, भभुआ। कैमूर जिले में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। हालात यह हैं कि सुबह की सैर पर निकलने वाले लोग, स्कूल जाने वाले बच्चे और शाम के समय बाजार आने-जाने वाले लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।

    बीते छह महीनों में जिले में करीब 5600 लोग कुत्तों के काटने से जख्मी हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस वर्ष जनवरी में 1399, फरवरी माह में 1523, मार्च माह में 1449, अप्रैल में 1005, मई में 960, जून में 1263 लोगजख्मी हुए हैं।

    वैसे सदर अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 55 से 60 जख्मी लोग एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की रहती है। कई मरीज ऐसे भी आते हैं जिन्हें गंभीर रूप से घायल होने के कारण अतिरिक्त उपचार की आवश्यकता पड़ती है।

    जिले के भभुआ शहर के अलावा मोहनियां, रामगढ़, चैनपुर, भगवानपुर, कुदरा और अन्य प्रखंडों से भी कुत्तों के काटने से जख्मी लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। शहर के कई वार्डों, मुख्य सड़कों, बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और मोहल्लों में आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते देखे जा सकते हैं। रात के समय इनका आतंक और बढ़ जाता है।

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    लोगों का कहना है कि सुबह टहलने निकलते समय कई बार कुत्तों के झुंड अचानक दौड़ पड़ते हैं। बाइक और साइकिल सवारों का पीछा करना आम बात हो गई है। छोटे बच्चों को स्कूल भेजते समय अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। कई जगहों पर बच्चों को अकेले भेजने के बजाय परिजन स्वयं छोड़ने जा रहे हैं।

    लोगों ने बताया कि कूड़े के ढेर और खुले में फेंके जाने वाले खाद्य पदार्थों के कारण आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रात में ये झुंड बनाकर घूमते हैं और कई बार राहगीरों पर हमला भी कर देते हैं। बाजार बंद होने के बाद इनका आतंक और अधिक दिखाई देता है।

    वैसे स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को भी इससे बचाव के बारे में जागरूक करना जरूरी है। उन्हें सिखाया जाना चाहिए कि किसी अनजान कुत्ते को छेड़ें नहीं, उसके पास अचानक न जाएं और यदि कोई कुत्ता आक्रामक हो जाए तो भागने की बजाए शांत रहने का प्रयास करें तथा सुरक्षित स्थान की ओर धीरे-धीरे हटें।

    बचाव के लिए जरूरी सावधानी:

    • कुत्ते के काटने पर घाव को तुरंत 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोएं
    • बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल जाकर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाएं
    • चिकित्सक की सलाह के अनुसार वैक्सीन की सभी खुराक समय पर लें
    • आवारा कुत्तों को छेड़ने या उनके झुंड के बीच जाने से बचें
    • बच्चों को अकेले सुनसान रास्तों पर भेजने से बचें और उन्हें सावधानी के बारे में जागरूक करें

    क्या कहते हैं अधिकारी?

    सदर अस्पताल में कुत्ता के काटने से जख्मी लोगों के लिए एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है। जख्मी लोगों को निर्धारित समय पर वैक्सीन की सभी खुराक पूरी करनी चाहिए। कई लोग पहली खुराक लेने के बाद आगे की डोज नहीं लगवाते, जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है। - डॉ. चंदेश्वरी प्रसाद, सिविल सर्जन