यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 30, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Bihar Politics: 'लालू परिवार का हसीन सपना...', मीसा-रोहिणी का नाम लेकर ये क्या बोल गए सम्राट चौधरी
बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि चार जून को लालू परिवार (Lalu Yadav Family) का हसीन सपना चकनाचूर हो जाएगा। मीसा भारती और रोहिणी आ ...और पढ़ें

संवाद सूत्र, रामगढ़। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) ने कहा कि राजद-कांग्रेस से संविधान को खतरा है। नरेंद्र मोदी लोकतंत्र को मजबूत कर रहे हैं। वे रामगढ़ हाईस्कूल के मैदान में बक्सर लोकसभा क्षेत्र के एनडीए प्रत्याशी मिथिलेश तिवारी के समर्थन में आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे।
सम्राट चौधरी ने कहा कि चार जून को लालू परिवार (Lalu Yadav Family) का हसीन सपना चकनाचूर हो जाएगा। मीसा भारती और रोहिणी आचार्य की संभावित हार से लालू प्रसाद हताश हैं। एक को सारण के लोगों ने ठुकरा दिया है तो दूसरी को पाटलिपुत्र की जनता ने तीसरी बार भी खारिज करने का मन बना लिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश की जनता को परिवारवादियों व भ्रष्टाचारियों पर नहीं बल्कि विकसित भारत के संकल्प के साथ देश को आगे बढ़ा रहे नरेंद्र मोदी की भ्रष्टाचारमुक्त सरकार पर भरोसा है।
'लालू बीमारी और इलाज के बहाने जेल से बाहर हैं'
उन्होंने कहा कि चारा घोटाले के सजायाफ्ता लालू प्रसाद बीमारी व इलाज के बहाने जेल से बाहर आए हैं। केवल परिवार तक सीमित रहने वाले लालू प्रसाद अपनी बेटियों को लेकर परेशान हैं, जबकि नरेंद्र मोदी (PM Modi) देश की 140 करोड़ जनता की समृद्धि और भारत को पूरी दुनिया में श्रेष्ठ बनाने के लिए प्रयासरत हैं।
'लालू और मोदी में फर्क समझ रही है जनता'
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बिहार की जनता 'सबका साथ, सबका विकास' के संकल्प के साथ देश को समृद्धि की ओर ले जाने वाले नरेंद्र मोदी और भ्रष्टाचार, गबन- घोटाले और भय की राजनीति करने वाले लालू प्रसाद के बीच फर्क साफ-साफ समझ रही है। यह नया भारत है, इसमें झूठ, झांसा, भय, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है।
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इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा कि यह चुनाव प्रधानमंत्री का चुनाव है। चारा घोटाला करने वालों का बिहार से विदाई करने का जनता मन बना चुकी है। लालू प्रसाद सारण में एक माह टिकने के बाद हताश होकर पटना लौट आए हैं।