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    'किसानों से छिनेगी आजीविका', नई भूमि क्रय नीति पर भड़के MP सुधाकर, CM सम्राट से फैसला वापस लेने की मांग

    Updated: Thu, 02 Jul 2026 02:55 PM (IST)

    बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार रैयती भूमि क्रय नीति 2026 को किसानों के हितों के खिलाफ बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस नीति को तुरंत वापस लेने य ...और पढ़ें

    नई भूमि क्रय नीति पर भड़के MP सुधाकर, CM सम्राट से फैसला वापस लेने की मांग

    नई भूमि क्रय नीति पर भड़के MP सुधाकर, CM सम्राट से फैसला वापस लेने की मांग

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    संवाद सूत्र, रामगढ़। बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार सरकार द्वारा लागू की गई बिहार रैयती भूमि क्रय नीति 2026 पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया है और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस नीति को तुरंत वापस लेने या स्थगित करने की मांग की है।

    उनका कहना है कि बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां भूमि केवल संपत्ति नहीं, बल्कि करोड़ों किसानों की आजीविका और सामाजिक सम्मान का आधार है।

    सुधाकर ने चेतावनी दी कि यदि निजी कंपनियों और बड़े पूंजीपतियों को सरकारी तंत्र के माध्यम से रैयती भूमि खरीदने की अनुमति दी जाती है, तो इससे किसानों की आर्थिक सुरक्षा और कृषि व्यवस्था पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ेंगे।

    उन्होंने कहा कि यह नीति भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की मूल भावना के विपरीत है।

    विशेष रूप से, अधिनियम की धारा 46 के अंतर्गत निजी कंपनियों द्वारा भूमि क्रय की स्थिति में पुनर्वास की व्यवस्था अनिवार्य है, लेकिन राज्य सरकार ने इस संबंध में कोई स्पष्ट नियमावली नहीं बनाई है। यदि इन प्रावधानों का पालन नहीं किया गया, तो भूमि क्रय के मामले में कानूनी विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।

    सुधाकर ने यह भी कहा कि अधिनियम की धारा 46(5) राज्य सरकार को निजी कंपनियों द्वारा खरीदी जाने वाली भूमि की अधिकतम सीमा निर्धारित करने का अधिकार देती है, लेकिन नई नीति में इस संबंध में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। यदि कोई अधिकतम सीमा नहीं होगी, तो बड़े कॉरपोरेट समूह हजारों एकड़ कृषि भूमि खरीदकर असमान वितरण को बढ़ावा देंगे, जिससे किसानों को अपनी जमीन से बेदखल होने का खतरा हो सकता है।

    उन्होंने कहा कि भूमि मूल्य निर्धारण के लिए केवल निबंधन विभाग की दरों को आधार बनाना उचित नहीं है। किसानों को उनकी भूमि का वास्तविक बाजार मूल्य मिलना चाहिए। सांसद ने सरकार से पूछा कि इस नीति से राज्य सरकार, किसानों या आम जनता को क्या लाभ होगा।

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    उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए बिहार रैयती भूमि क्रय नीति 2026 को तुरंत वापस लिया जाए या स्थगित किया जाए।