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    जिंदा आदमी ले गए थे, जिंदा वापस करें; कारा अभिरक्षा में बंदी की मौत पर बवाल, कटिहार में सड़क पर शव रख पुलिस को घेरा

    Updated: Mon, 20 Jul 2026 09:13 PM (IST)

    कटिहार के कोलासी में बाबूलाल मुंडा की कारा अभिरक्षा में मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाते हुए सड़क जाम कर प्र ...और पढ़ें

    कटिहार में कारा अभिरक्षा में कैदी की मौत पर भड़का गुस्सा, स्वजनों ने शव सड़क पर रख किया घेराव, जांच के आदेश

    कटिहार में कारा अभिरक्षा में कैदी की मौत पर भड़का गुस्सा, स्वजनों ने शव सड़क पर रख किया घेराव, जांच के आदेश

    HighLights

    1. बाबूलाल मुंडा की कारा अभिरक्षा में हुई मौत।

    2. परिजनों ने पुलिस पर मारपीट का गंभीर आरोप लगाया।

    3. प्रशासन ने 5 लाख मुआवजे और जांच का आश्वासन दिया।

    संवाद सूत्र, कोलासी (कटिहार)। कोढ़ा प्रखंड के कोलासी पुलिस शिविर क्षेत्र अंतर्गत मतवा टोली वार्ड संख्या-13 निवासी बाबूलाल मुंडा की कारा अभिरक्षा में तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान सदर अस्पताल में मौत हो गई।

    शव रखकर किया सड़क जाम

    घटना के विरोध में आक्रोशित स्वजनों और ग्रामीणों ने सोमवार को कोलासी पुलिस शिविर का घेराव किया और शव को सड़क पर रखकर कटिहार-गेड़ाबाड़ी मुख्य मार्ग को करीब दो घंटे तक पूरी तरह जाम रखा।

    मारपीट का लगाया गंभीर आरोप

    प्रदर्शन कर रहे परिजनों ने पुलिस और कारा प्रशासन पर हिरासत के दौरान गंभीर मारपीट करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन जिस आदमी को सही-सलामत ले गया था, उसे उसी हालत में वापस करे।

    पांच लीटर शराब का आरोप

    जानकारी के अनुसार मद्य निषेध विभाग की टीम ने गुरुवार को बाबूलाल मुंडा को पांच लीटर देसी शराब बेचने के आरोप में हिरासत में लिया था और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर जेल भेज दिया था।

    शुक्रवार को बिगड़ी थी तबीयत

    जेल में बंद कैदी बाबूलाल मुंडा की शुक्रवार की शाम अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। जेल प्रशासन द्वारा उन्हें तुरंत बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल कटिहार में भर्ती कराया गया था।

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    सोमवार तड़के हुई मौत

    सदर अस्पताल में इलाज के दौरान सोमवार की अहले सुबह करीब चार बजे बाबूलाल मुंडा की मौत हो गई। मौत की सूचना जैसे ही मतवा टोली गांव पहुंची, स्वजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।

    निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े

    ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि बाबूलाल की मौत सामान्य बीमारी से नहीं, बल्कि हिरासत और जेल में हुई बेदर्दी से पिटाई के कारण हुई है। उन्होंने दोषी कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

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    दो घंटे तक थमीं रफ्तारें

    विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम के कारण कटिहार-गेड़ाबाड़ी मुख्य मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे भीषण गर्मी में राहगीरों और यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।

    परिवार का इकलौता कमाने वाला

    मृतक के भाई देवनारायण मुन्न और ग्रामीणों ने बताया कि बाबूलाल ही अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। उसके पीछे उसकी पत्नी और तीन छोटी-छोटी बेटियां बेसहारा हो गई हैं।

    आर्थिक सहायता की गुहार

    असामयिक मौत से परिवार के समक्ष रोजी-रोटी का गहरा संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को उचित सरकारी मुआवजा, बच्चों की मुफ्त शिक्षा और आजीविका की व्यवस्था करने की मांग की।

    मौके पर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी

    हंगामे की सूचना पर सदर डीएसपी-टू सुनील कुमार शर्मा, अंचलाधिकारी संजीव कुमार, सर्किल इंस्पेक्टर साजेद आलम, कोढ़ा अपर थानाध्यक्ष कुणाल कुमार और कोलासी कैंप प्रभारी श्रवण कुमार भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे।

    मानवाधिकार के तहत मुआवजा

    अधिकारियों ने उग्र ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया। अंचलाधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

    लिखित आवेदन पर जांच शुरू

    मृतक की पत्नी ने घटना के संबंध में अधिकारियों को लिखित आवेदन सौंपा है। अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच और मुआवजा प्रक्रिया का ठोस आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम समाप्त किया।

    आरोप बेबुनियाद है। जांच के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा।
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    — उदय कुमार, जेल अधीक्षक, कटिहार