निःशब्द कर देगी यह तस्वीर! कटिहार में जहां गूंजता था बच्चों का ककहरा, वहां भूखे पेट कटोरा थामे पानी में उतरा बचपन
Katihar Flood Child Photo: कटिहार में गंगा और सहायक नदियों की बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, जहां एक ...और पढ़ें

Katihar Flood Child Photo: गंदे पानी में नंगे पांव और हाथ में कटोरा; कटिहार के संथाली टोला से आई तस्वीर ने झकझोरा, स्कूलों में लटके ताले
HighLights
कटिहार में बाढ़ से प्रभावित बच्चे की मार्मिक तस्वीर सामने आई।
मनिहारी प्रखंड के 36 से अधिक स्कूल बाढ़ में डूबे।
लगभग 15 हजार बच्चों की शिक्षा पूरी तरह बाधित हुई।
जागरण संवाददाता, कटिहार। Katihar Flood Child Photo: विकास के बड़े-बड़े दावे, डिजिटल क्रांति और चांद तक पहुंचने का मानवीय गुरूर... ये सब उस वक्त पानी के तेज बहाव में तिनके की तरह बह जाते हैं, जब कटिहार के बाढ़ प्रभावित दियारा से एक मासूम बचपन की ऐसी तस्वीर सामने आती है। कमर तक मटमैले और बदबूदार बाढ़ के पानी को नन्हें पैरों से चीरता हुआ एक अर्धनग्न बच्चा, जिसके एक हाथ में प्लास्टिक का कटोरा है और उस कटोरे में है सामुदायिक किचन से मिला चंद निवालों का सहारा।
चेहरे पर न तो बाढ़ का खौफ है और न ही कपड़ों की चिंता; उसके चेहरे पर सिर्फ इस बात का संतोष और खुशी है कि आज चूल्हा बुझने के बावजूद उसे भूखे पेट नहीं सोना पड़ेगा। यह तस्वीर सिर्फ एक आपदा की विभीषिका नहीं दर्शाती, बल्कि यह हमारे पूरे सभ्य समाज और व्यवस्था की संवेदनहीनता पर एक गहरा और मौन तमाचा है।
यह मार्मिक दृश्य कटिहार जिले के बरारी प्रखंड अंतर्गत मोहना चांदपुर पंचायत के वार्ड नंबर 15 स्थित संथाली टोला का है। इलाके में गंगा और सहायक नदियों का पानी इस कदर घरों में समा चुका है कि गरीबों के चूल्हे कई दिनों से ठंडे पड़े हैं। बच्चे के खेलने और पढ़ने की उम्र में जब उसके हाथों में बस्ता और स्लेट होनी चाहिए थी, तब सैलाब की मजबूरी ने उसके हाथों में राहत का कटोरा थमा दिया है।
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मनिहारी में ककहरे पर सैलाब का पहरा, 36 स्कूलों के परिसर डूबे
त्रासदी सिर्फ घरों और चूल्हों तक सीमित नहीं है, इसने नौनिहालों के सुनहरे भविष्य पर भी कड़ा ताला जड़ दिया है। कटिहार के मनिहारी प्रखंड में गंगा नदी के विकराल रूप ने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है। जिन प्राथमिक और मध्य विद्यालयों के परिसरों में हर सुबह बच्चों के ककहरे और प्रार्थना की गूंज सुनाई देती थी, वहां अब सिर्फ सैलाब की भयावह लहरों का शोर सुनाई दे रहा है।
बरारी प्रखंड के मोहना चांदपुर पंचायत (संथाली टोला) से सामने आई दिल दहला देने वाली तस्वीर, बाढ़ के पानी में कटोरा थामे दिखा मासूम
मनिहारी प्रखंड में गंगा के उफान से 36 से अधिक विद्यालयों में घुसा बाढ़ का पानी, लगभग 15 हजार बच्चों का पठन-पाठन पूरी तरह ठप
उत्क्रमित उच्च विद्यालय मदरीचक, मध्य विद्यालय मदारीचक, बुढ़िया टिकर व लक्ष्मीपुर सहित दर्जनों प्राथमिक स्कूल जलमग्न
सुरक्षा के मद्देनजर बंद किए गए स्कूल, शिक्षकों को निकटवर्ती गैर-प्रभावित विद्यालयों से सम्बद्ध कर जारी रखा गया प्रशासनिक कार्य
प्रखंड क्षेत्र के लगभग तीन दर्जन से अधिक सरकारी प्राथमिक, मध्य और उच्च विद्यालयों के क्लासरूम और परिसरों में 3 से 4 फीट तक बाढ़ का पानी भर गया है। स्थिति इतनी विकट है कि ऐहतियात और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को स्कूल बंद करने का फैसला लेना पड़ा है। इसके चलते अकेले मनिहारी प्रखंड के करीब 15 हजार बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई है।
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शिक्षकों को दूसरे स्कूलों से किया गया सम्बद्ध, पठन-पाठन ठप
बाढ़ के तांडव की चपेट में आने वाले प्रमुख स्कूलों में उत्क्रमित उच्च विद्यालय मदरीचक, मध्य विद्यालय मदारीचक, प्राथमिक विद्यालय बुढ़िया टिकर, प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मीपुर, प्राथमिक विद्यालय शाहपुर, प्राथमिक विद्यालय बाबरबन्नी और नया प्राथमिक विद्यालय कालीगंज बांध मुख्य रूप से शामिल हैं। इन स्कूलों के खेल मैदान, बरामदे और कमरे जलमग्न हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जब तक बाढ़ का पानी पूरी तरह उतर नहीं जाता और परिसरों की साफ-सफाई व ब्लीचिंग नहीं हो जाती, तब तक कक्षाएं संचालित करना जान जोखिम में डालने जैसा होगा। हालांकि, शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जलमग्न विद्यालयों के शिक्षक और शिक्षिकाओं को निकटवर्ती सुरक्षित व सूखे विद्यालयों से सम्बद्ध (टैग) कर दिया गया है, ताकि जरूरी कागजी और सरकारी कामकाज जारी रह सके। लेकिन दियारे के हजारों गरीब बच्चों के लिए किताबें फिलहाल बस्ते में बंद हैं और उनकी आंखें सिर्फ जलस्तर घटने का इंतजार कर रही हैं।
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