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    बिहार के गांवों में परिसीमन की आहट: नए सिरे से तय होंगी पंचायत की सीमाएं, मुखिया जी के बदल जाएंगे समीकरण

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 01:31 PM (IST)

    कटिहार में तीन दशक बाद पंचायतों के परिसीमन की अधिसूचना जारी होने से राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इससे पंचायतों का स्वरूप बदलने, नई पंचाय ...और पढ़ें

    परिसीमन से बदलेगा पंचायतों का भूगोल, नए राजनीतिक समीकरणों की शुरू हुई तलाश

    परिसीमन से बदलेगा पंचायतों का भूगोल, नए राजनीतिक समीकरणों की शुरू हुई तलाश

    HighLights

    1. कटिहार में तीन दशक बाद पंचायतों का परिसीमन शुरू।

    2. नई पंचायतों के गठन से बदलेगा ग्रामीण राजनीतिक समीकरण।

    3. आरक्षण रोस्टर और सीटों पर भी होगा सीधा असर।

    संजीव मिश्रा, कदवा (कटिहार)। करीब तीन दशक बाद पंचायतों के परिसीमन को लेकर पंचायती राज विभाग की अधिसूचना जारी होने के साथ ही जिले में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्रस्तावित परिसीमन के बाद कई पंचायतों का स्वरूप बदलने की संभावना है, वहीं नई पंचायतों के गठन को लेकर भी अटकलें लगाई जाने लगी हैं।

    चौक-चौराहों से लेकर गांव की चौपालों तक लोग संभावित नई पंचायतों की सीमाओं, नामकरण और चुनावी समीकरणों पर चर्चा कर रहे हैं। विभागीय निर्देश के अनुसार, परिसीमन वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा।

    बढ़ती आबादी और प्रशासनिक आवश्यकताओं को देखते हुए अधिक जनसंख्या वाले पंचायतों एवं वार्डों का पुनर्गठन किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, नए परिसीमन में सर्वाधिक आबादी वाले गांव के नाम पर पंचायत का नामकरण किए जाने की भी संभावना है। इससे कई पुराने पंचायतों की पहचान और भौगोलिक स्वरूप में बदलाव देखने को मिल सकता है।

    परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। यदि नई पंचायतों का गठन होता है तो मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य तथा जिला परिषद प्रतिनिधित्व के नए अवसर भी सृजित होंगे। यही कारण है कि कई संभावित उम्मीदवार अभी से अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ाने लगे हैं।

    परिसीमन का असर केवल प्रशासनिक ढांचे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव ग्रामीण राजनीति पर भी पड़ेगा। पंचायतों की सीमाएं बदलने से मतदाताओं का स्वरूप और सामाजिक समीकरण भी बदलेंगे। कई पंचायतों में वर्षों से प्रभाव रखने वाले राजनीतिक समूहों को नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ सकती है।

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    जातीय एवं सामाजिक संतुलन में संभावित बदलाव को देखते हुए राजनीतिक रूप से सक्रिय लोग नए समीकरणों का आकलन करने में जुट गए हैं। आरक्षण रोस्टर को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।

    परिसीमन के बाद पंचायतों के पुनर्गठन के साथ आरक्षित और अनारक्षित सीटों की स्थिति में भी बदलाव संभव माना जा रहा है। ऐसे में वर्तमान जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे नए चेहरे भी अंतिम परिसीमन और आरक्षण सूची का इंतजार कर रहे हैं।

    ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने-अपने स्तर पर संभावित नई पंचायतों का खाका तैयार कर रहे हैं। कौन-सा गांव किस पंचायत में जाएगा, किस पंचायत का नाम बदलेगा और किन क्षेत्रों को अलग कर नई पंचायत बनाई जा सकती है, इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

    हालांकि, वास्तविक स्थिति परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल इतना तय है कि प्रस्तावित परिसीमन पंचायत व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाला है।

    नई पंचायतों के गठन, बदलती सीमाओं, आरक्षण की संभावनाओं और उभरते नेतृत्व की आकांक्षाओं के बीच आगामी पंचायत चुनाव अभी से ग्रामीण जनजीवन और राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है। परिसीमन की अंतिम तस्वीर सामने आने तक अटकलों और संभावनाओं का यह दौर जारी रहने की उम्मीद है।

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