कटिहार : मन्नत पूरी होते ही दान कर रहे लोग, 120 एकड़ जमीन वाली गोशाला बनी चर्चा में
कटिहार के कदवा स्थित 105 वर्ष पुरानी पूर्णिमा देवी गोशाला आस्था का केंद्र बन गई है, जहाँ मन्नतें पूरी होने पर लोग गाय दान कर रहे हैं। यह गोशाला 120 एक ...और पढ़ें

कटिहार की पूर्णिमा देवी गोशाला: 100 साल पुरानी परंपरा, दान से हो रहा बड़ा विकास
संवाद सूत्र, कदवा (कटिहार)! भारतीय संस्कृति में गोसेवा को सर्वोच्च धर्म माना गया है, जिसे न केवल आध्यात्मिक पुण्य बल्कि मानसिक शांति और पर्यावरण संरक्षण का भी माध्यम माना जाता है। कदवा प्रखंड में स्थित 105 वर्ष पुरानी पूर्णिमा देवी गोशाला आज लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। यहां मन्नतें पूरी होने पर देश के विभिन्न हिस्सों से लोग पहुंचकर गाय दान कर रहे हैं और गोसेवा से जुड़ रहे हैं।
100 वर्षों से अधिक पुरानी है गोशाला
इस ऐतिहासिक गोशाला की स्थापना वर्ष 1920 में की गई थी। वर्तमान में गोशाला के पास लगभग 120 एकड़ कीमती भूमि दान के रूप में उपलब्ध है। सड़क किनारे विस्तृत क्षेत्र में फैली यह गोशाला अब एक आध्यात्मिक और सामाजिक केंद्र के रूप में विकसित हो चुकी है, जहां लोग पहुंचकर शांति और सुकून का अनुभव करते हैं।
आस्था और परंपरा से जुड़ रहे लोग
हाल के वर्षों में गोसेवा के प्रति लोगों की आस्था तेजी से बढ़ी है। स्थानीय लोग यहां विवाह, जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ और अन्य शुभ अवसरों पर पहुंचते हैं। लोग गोशाला परिसर स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं और गायों को गुड़ व चारा खिलाकर पुण्य अर्जित करते हैं।
देश-विदेश से हो रहा दान
गोशाला के विकास में देश के विभिन्न हिस्सों से लोग योगदान दे रहे हैं। मन्नत पूरी होने पर कई दानदाता यहां गाय दान कर रहे हैं और विकास कार्यों में सहयोग दे रहे हैं। बेंगलुरु के एक इंजीनियर दंपति ने गोशाला में गो-शेड का निर्माण कराया है, जबकि पेलागढ़ के व्यवसायी दिलीप राज सिंह ने अपनी पत्नी की स्मृति में राजस्थान के गुलाबी पत्थर से भव्य प्रवेश द्वार बनवाया है।
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भव्य मंदिर और सुविधाओं का विकास
गोशाला परिसर में एक भव्य राधा-कृष्ण मंदिर का निर्माण भी किया गया है, जिसे एक धर्मप्रेमी दानदाता द्वारा बनवाया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ-साथ गौसेवा भी करते हैं, जिससे इस स्थान का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
लगातार बढ़ रहा दान और सहयोग
हाल के दिनों में तमिलनाडु के कोयंबटूर निवासी प्रदीप बुबना, गंगटोक के संजय मित्तल और किशनगंज के ठाकुरगंज निवासी संजय मोर ने भी दुधारू गायों का दान किया है। दानदाताओं का कहना है कि उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होने के बाद उन्होंने गोशाला में योगदान देने का निर्णय लिया।
गोशाला का हो रहा समुचित विकास
गोशाला के सचिव लीलानंद पोद्दार ने बताया कि वर्तमान प्रबंधन समिति के सक्रिय प्रयासों से गोशाला का लगातार विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में बढ़ती आस्था और दान के कारण यहां आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है और गोसेवा गतिविधियों को और मजबूत किया जा रहा है।
पूर्णिमा देवी गोशाला
पूर्णिमा देवी गोशाला आज न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि सामाजिक सहयोग और सेवा भावना का भी प्रतीक बन चुकी है। देशभर से मिल रहे दान और लोगों की बढ़ती आस्था ने इसे एक जीवंत तीर्थस्थल का स्वरूप दे दिया है।