कटिहार : सामाजिक डर और ममत्व के बीच पिसती रही मां, एक ओर प्रेमी दूसरी ओर बेटे का शव
कटिहार के कदवा में एक मां सामाजिक डर के कारण अपने बेटे के शव को छोड़कर फरार हो गई। तीन साल पहले प्रेमी के साथ राजस्थान गई राधा देवी अपने 19 वर्षीय बेट ...और पढ़ें

पंचायत को लेकर बैठक करते हुए लोग।
HighLights
मां सामाजिक डर के कारण बेटे का शव छोड़कर भागी।
जयपुर में काम के दौरान 19 वर्षीय बेटे की मौत हुई।
बेटे के शव को मां का 17 घंटे इंतजार करना पड़ा।
संवाद सूत्र, कदवा (कटिहार)। सामाजिक डर और व्यक्तिगत भय ने एक मां के सिर पर कलंक लगा दिया। पति को छोड़कर प्रेमी के साथ राजस्थान भागने वाली मां अपने बेटे का शव छोड़कर फरार हो गई, जिसे लेकर वह जयपुर से कदवा के भर्री गांव पहुंची थी।
मृत किशोर की पहचान भर्री निवासी कन्हैया रविदास के पुत्र मानिक कुमार के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, मानिक की मां राधा देवी तीन वर्ष पूर्व अपने प्रेमी सोनू कुमार के साथ अपने बड़े पुत्र और बेटी को लेकर राजस्थान चली गई थी। दोनों वहां मजदूरी करके जीवनयापन कर रहे थे। मानिक की मौत ने मां को मजबूर कर दिया कि वह बेटे के शव के साथ गांव लौटे।
मां राधा देवी ने बताया कि गांव लौटने पर उसे मारपीट और लोक लज्जा का डर सता गया। इसी भय के चलते वह थाना से निकलकर छुप गई थी। ग्रामीणों और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा आश्वासन मिलने और स्थिति स्पष्ट होने के बाद वह अंततः वापस घर लौटी।

दो दिन पूर्व राजस्थान के जयपुर में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में कार्य के दौरान 19 वर्षीय मानिक कुमार की मौत हो गई। घटना के बाद पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें मौत का कारण माथे में चोट बताया गया।
शव को लेकर मृतक की मां और मामा साजन रविदास एंबुलेंस से गुरुवार रात कदवा थाना पहुंचे। वहां से एंबुलेंस गांव स्थित घर पर आई, लेकिन इस दौरान मां थाना से फरार हो गई। मृतक का पिता भी प्रदेश में मजदूरी करता है और घर पर मौजूद नहीं था।
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मामा साजन रविदास ने बताया कि कंस्ट्रक्शन कंपनी ने मृतक की मां को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया था। इस बात के सामने आने के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएँ होने लगीं।
घर के सामने बहुत देर तक एंबुलेंस खड़ी रही, जिसके बाद प्रमुख मंटू रविदास, पैक्स अध्यक्ष ओमप्रकाश भगत, समाजसेवी मंगलानंद झा, कपिल पासवान और अन्य लोग पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली। फिर फोन पर मां से बात की गई। तदुपरांत मां घर लौटी और दोपहर बाद बेटे का अंत्येष्टि किया गया।
इस दौरान एंबुलेंस में रखे बेटे के शव को 17 घंटे तक मां के आने का इंतजार करना पड़ा, जो संवेदनहीनता और सामाजिक दृष्टि से बेहद चौंकाने वाली घटना मानी जा रही है।