Bahadurganj Election 2025: बागियों से सबकी 'हवा टाइट', 9 बांकुरे मैदान में; बहादुरगंज में 11 नवंबर को करें मतदान
Bahadurganj Assembly Election 2025: किशनगंज जिले की बहादुरगंज विधानसभा सीट पर बागी उम्मीदवारों के उतरने से मुकाबला रोचक हो गया है। बागी, मुख्य दलों के ...और पढ़ें

Bahadurganj Assembly Election 2025: बहादुरगंज में दूसरे चरण में 11 नवम्बर को मतदान होना है। यहां से नौ प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।
HighLights
बागी उम्मीदवार बढ़ा सकते हैं मुश्किलें
मतदाता नहीं खोल रहे अपना पत्ता
दलीय प्रत्याशियों की बढ़ी चिंता
चंद्रभूषण सिंह, बहादुरगंज (किशनगंज)। Bihar Chunav 2025 बिहार चुनाव 2025 के लिए मतदान का समय नजदीक आने के साथ ही बहादुरगंज विधानसभा में चुनावी सरगर्मी तेज होते जा रही है। हर पार्टी अपने अपने स्तर से मतदाताओं को रिझाने लगे हैं। परंतु मतदाता अपना पत्ता नहीं खोल रहे हैं। जबकि बागियों के तेवर दलीय प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ा सकती है। बहादुरगंज में दूसरे चरण में 11 नवम्बर को मतदान होना है। यहां से नौ प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।
महागठबंधन की ओर से कांग्रेस से प्रो. मुस्सबिर आलम, एआइएमआइएम से तौसीफ आलम, एनडीए में लोजपा आर से कलीमुद्दीन, आप से मासूम रेजा, जनसुराज से भाजपा के बागी नेता वरूण सिंह एवं स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में रोहित कुमार झा मैदान में हैं। हर प्रत्याशी मतदाताओं के बीच जाकर अपनी-अपनी बातों को रख रहे हैं। परंतु अबतक कुछ स्पष्ट नजर नहीं आ रहा है।
राजद विधायक अंजार नईमी को पार्टी गठबंधन के तहत टिकट नहीं मिलने पर पार्टी नेतृत्व के निर्देश का पालन करते हुए कांग्रेस के प्रत्याशी को समर्थन किये हैं। परंतु कांग्रेस टिकट के दावेदार रहे कांग्रेस कुछ वरिष्ठ नेता टिकट वितरण को लेकर नाराज भी चल रहे हैं। वही पूर्व विधायक तौसीफ आलम कांग्रेस को छोड़कर एआइएमआइएम से मैदान में उतरे हैं। जिससे नाराज होकर मासूम रेजा बागी बन गये और एआइएमआइएम छोड़कर आम आदमी पार्टी से चुनावी मैदान में कूद पड़े हैं।
जबकि एनडीए में भाजपा के वरिष्ठ नेता वरूण सिंह पार्टी के निर्णय पर बगावत कर जनसुराज से मैदान में उतर गये हैं। ऐसे में कई पार्टी के अन्दर कुछ न कुछ खींचतान जारी है। बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र के 154956 पुरूष, 136158 महिला एवं 13 अन्य मतदाता सहित कुल दो लाख 91, 127 मतदाता है। जिसमें लगभग 62 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम समुदाय से आते हैं।
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गंगई समाज, सतगोप समाज, आदिवासी समाज की आबादी भी कम नहीं है। फिलहाल मतदाता हर पार्टी के प्रत्याशी पर नजर रख रहे हैं। नेताओं का दौरा भी शुरू हो गया है। बागी प्रत्याशी कितने तक सफल होंगे यह तो भविष्य के गर्त में छिपा है। लेकिन परेशानी जरूर बढ़ा दी है। वैसे सभी को मतदान व मतगणना का इंतजार है।