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बिहार: एक क्लिक में खुलेगी संपत्तियों की कुंडली, जमीन-मकान के मालिकाना हक का भी मिलेगा ब्योरा

Published: Thu, 05 Nov 2026 06:09 PM (IST)

किशनगंज नगर परिषद ने शहर में संपत्ति का डिजिटल सर्वे कराया है, जिससे अब एक क्लिक पर जमीन और मकान ...और पढ़ें

एक क्लिक में खुलेगी संपत्तियों की कुंडली, जमीन-मकान के मालिकाना हक का भी मिलेगा ब्योरा (AI Generated Image)

एक क्लिक में खुलेगी संपत्तियों की कुंडली, जमीन-मकान के मालिकाना हक का भी मिलेगा ब्योरा (AI Generated Image)

HighLights

  1. किशनगंज में डिजिटल संपत्ति सर्वे से अब एक क्लिक पर जानकारी।

  2. 18,736 भवन और 9,000 खाली प्लॉट हुए चिह्नित।

  3. राजस्व बढ़ेगा, धोखाधड़ी रुकेगी, शहरी विकास को मिलेगी गति।

अमरेंद्र कांत, किशनगंज। शहर में किस व्यक्ति के नाम कितनी जमीन है, उस पर मकान बना है या प्लॉट खाली है, इसकी जानकारी अब एक क्लिक पर उपलब्ध होगी। किशनगंज नगर परिषद के सभी 34 वार्डों में कराए गए संपत्ति सर्वे के बाद डिजिटल सूची तैयार की गई है।

इसमें 18,736 भवन और करीब नौ हजार खाली जमीन के प्लाट चिह्नित किए गए हैं। बिहार ई-प्रॉपर्टी वेबसाइट पर यह विवरण जल्द सार्वजनिक किया जाएगा। इससे संपत्ति के मालिक का नाम, जमीन और मकान का विवरण तथा रजिस्ट्री से जुड़ी जानकारी प्राप्त करना आसान होगा।

इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य केवल संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार करना और होल्डिंग टैक्स वसूलना नहीं है, बल्कि शहर की जमीन और भवनों का व्यवस्थित डेटाबेस तैयार करना भी है।

इससे नगर परिषद को पता चल सकेगा कि किस वार्ड में कितने आवासीय और व्यावसायिक भवन हैं तथा कितनी जमीन खाली पड़ी है। भविष्य में सड़क, नाला, जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाओं की योजना तैयार करने में भी इन आंकड़ों का उपयोग किया जा सकेगा।

12 हजार लोगों को जारी किया गया नोटिस

नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी प्रवीण कुमार ने बताया कि वर्तमान में करीब 15,400 लोग होल्डिंग टैक्स जमा कर रहे हैं। वहीं, लगभग 12 हजार लोगों को नोटिस जारी किया गया है।

उन्होंने बताया कि कई लोगों ने शहर में जमीन खरीद रखी है, लेकिन वे यहां निवास नहीं करते हैं। इस कारण नोटिस पहुंचाने और होल्डिंग टैक्स के दायरे में लाने में परेशानी होती है। डिजिटल संपत्ति सूची से ऐसे भूखंडों और उनके मालिकों की पहचान करने में सहूलियत होगी।

टैक्स चोरी पर लगेगा लगाम, बढ़ेगा नगर परिषद का राजस्व

सर्वे के बाद ऐसे भवनों और खाली प्लॉट की पहचान आसान होगी, जो अब तक नगर परिषद के कर निर्धारण से बाहर रह गए हैं। इससे छिपी हुई संपत्तियों को कर के दायरे में लाया जा सकेगा।

भवन का वास्तविक उपयोग, क्षेत्रफल और संपत्ति के विवरण के आधार पर होल्डिंग टैक्स का निर्धारण करने में भी मदद मिलेगी। इससे राजस्व संग्रह में पारदर्शिता आएगी और नगर परिषद की आमदनी बढ़ेगी।

संपत्ति विवाद और फर्जीवाड़े पर भी रहेगी नजर

डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से जमीन और मकान से संबंधित जानकारी जुटाना आसान होगा। संपत्ति खरीदने-बेचने के दौरान उपलब्ध विवरण का मिलान करने में भी लोगों को सुविधा मिल सकती है। इससे संपत्ति के विवरण में गड़बड़ी, दोहरे रिकॉर्ड और संभावित फर्जीवाड़े की पहचान में मदद मिलेगी।

इसके अलावा नगर परिषद के पास जब सभी वार्डों की संपत्तियों का डिजिटल डेटाबेस होगा तो आबादी के विस्तार और भवनों की संख्या के अनुसार विकास योजनाएं तैयार करना आसान होगा।

किस इलाके में आवासीय विस्तार तेजी से हो रहा है, कहां व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं और किन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है, इसका आकलन किया जा सकेगा। इससे बजट आवंटन और विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने में भी मदद मिलेगी।

कार्यपालक पदाधिकारी प्रवीण कुमार ने बताया कि बिहार ई-प्रॉपर्टी वेबसाइट पर सर्वे से संबंधित पूरी जानकारी जल्द उपलब्ध कराई जाएगी। इससे नागरिकों को अपनी संपत्ति से संबंधित विवरण देखने के लिए नगर परिषद कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।

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