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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 25, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    मुस्लिम बहुल किशनगंज में हिंदू मतदाता निर्णायक फैक्टर, JDU और AIMIM ने खेल दिया नया दांव; ये है पिछला रिकॉर्ड

    Updated: Mon, 25 Mar 2024 02:07 PM (IST)

    Bihar Political News किशनगंज लोकसभा सीट मुस्लिम बहुल है। यहां करीब 68 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। यहां से पिछले तीन बार से लगातार कांग्रेस जीत रही है। ...और पढ़ें

    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर
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    HighLights

    1. किशनगंज में 68 प्रतिशत हैं मुस्लिम मतदाता
    2. पिछले तीन बार से लगातार जीत रही कांग्रेस
    3. जदयू और एआइएमआइएम ने प्रत्याशी घोषित किए

    चन्द्र भूषण सिंह, बहादुरगंज (किशनगंज)। Lok Sabha Elections 2024 किशनगंज लोकसभा सीट मुस्लिम बहुल है। यहां करीब 68 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। यहां से पिछले तीन बार से लगातार कांग्रेस (Congress) जीत रही है। 2019 में मोदी लहर में भी कांग्रेस प्रत्याशी डॉ जावेद अख्तर ने जदयू के महमूद अशरफ को शिकस्त दी थी।

    महमूद अशरफ का निधन चुनाव बाद वर्ष 2019 में ही हो गया। वह पूर्णिया जिला के बायसी विधानसभा क्षेत्र से आते थे। वह सुरजापूरी मुस्लिम थे।

    किशनगंज (Kishanganj Lok Sabha Seat) विधानसभा क्षेत्र निवासी कांग्रेस के प्रत्याशी जावेद अख्तर एवं कोचाधामन विधानसभा क्षेत्र निवासी असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआइएमआइएम के प्रत्याशी के रूप में अख्तरुल ईमान चुनावी मैदान में थे।

    ये दोनों भी सुरजापूरी मुस्लिम हैं। इस बार कांग्रेस व एआइएमआइएम ने अपने पुराने प्रत्याशी को फिर से मैदान में उतारा है।

    त्रिकोणीय मुकाबला की पूरी संभावना

    एनडीए की तरफ से कोचाधामन विधानसभा क्षेत्र के जदयू (JDU) प्रत्याशी मुजाहिद आलम भाग्य आजमा रहे हैं। इस बार तीनों राजनीतिक दलों के प्रत्याशी किशनगंज जिला से हैं एवं सुरजापूरी मुस्लिम हैं। त्रिकोणीय मुकाबला की पूरी संभावना जताई जा रही है।

    इसमें 32 प्रतिशत हिंदू मतदाताओं के साथ अमौर व बायसी विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं की भूमिका अहम होगी। यह वोट जिधर जाएगा, उसका पलड़ा भारी होने की संभावना है।

    पिछले विधानसभा चुनाव में अख्तरुल ईमान की अगुवाई में सीमांचल में एआइएमआइएम के पांच उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। बाद में चार विधायक पाला बदलकर राजद में चले गए थे।

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