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    नेपाली बहुओं के लिए गृह मंत्रालय का नया नियम, 7 साल की शादी और मैरेज सर्टिफिकेट के बाद ही भारतीय नागरिकता संभव

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 07:59 AM (GMT+05:30)

    भारतीय दूल्हे से शादी करने वाली नेपाली बहुओं को अब भारतीय मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए विवाह पंजीकरण अनिवार्य होगा। यह नियम 2025 के विधानसभा ...और पढ़ें

    सात साल का प्रवास और विवाह रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, तभी नेपाली बहुओं का नाम मतदाता सूची में हो सकेगा दर्ज

    सात साल का प्रवास और विवाह रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, तभी नेपाली बहुओं का नाम मतदाता सूची में हो सकेगा दर्ज

    HighLights

    1. विवाह पंजीकरण के बाद ही नेपाली बहुओं का नाम मतदाता सूची में।

    2. भारतीय नागरिकता के लिए 7 साल का निवास और जटिल प्रक्रिया।

    3. किशनगंज में 8500 नेपाली बहुओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए।

    संवाद सूत्र, ठाकुरगंज (किशनगंज)। भारतीय दूल्हे के साथ सात फेरों के सात साल पूरे कर चुकीं नेपाली बहुओं का नाम ही अब भारत की मतदाता सूची में दर्ज हो सकेगा। इसके लिए नेपाल मूल की बहुओं को निबंधन कार्यालय से अपने विवाह का निबंधन (मैरिज रजिस्ट्रेशन) कराना अनिवार्य कर दिया गया है। उधर, जिला प्रशासन द्वारा जागरूकता अभियानों के माध्यम से महिलाओं को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की वैधानिक प्रक्रिया और आवश्यक कागजातों की जानकारी दी जा रही है।

    8500 नेपाली बहुओं के कटे थे नाम

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव से पूर्व चलाए गए मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान में केवल किशनगंज जिले में करीब 8500 नेपाली बहुओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। अब भारत सरकार और निर्वाचन आयोग की गाइडलाइंस के तहत पुनः इनका नाम मतदाता सूची में जोड़ने की पहल शुरू की गई है।

    15-20 साल पहले हुई शादी, अब संकट

    ठाकुरगंज सीमावर्ती क्षेत्र में ब्याह कर भारत आईं पूजा कुमारी यादव, चंदना देवी, चंपा देवी, सामसा खातून और जहाना बेगम समेत कई महिलाओं ने अपना दर्द साझा किया। उन्होंने बताया कि उनकी शादी 15 से 20 वर्ष पूर्व भारत में हुई थी और पहले उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज भी था। लेकिन वर्ष 2025 के पुनरीक्षण में अचानक नाम काट दिए गए।

    जटिल कागजी प्रक्रिया से भारी परेशानी

    महिलाओं ने बताया कि अब भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए सरकार उनसे नेपाली नागरिकता त्याग पत्र, पति का जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट, रजिस्टर्ड मैरेज सर्टिफिकेट और भारत में लगातार सात वर्षों से रहने का प्रमाण पत्र मांग रही है। इतनी जटिल कागजी प्रक्रिया और औपचारिकताओं के कारण ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को भारी मानसिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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    विवाह निबंधन के लिए पहुंचे 167 आवेदन

    नेपाली बहुओं को कानूनी मान्यता दिलाने के लिए प्रक्रिया तेज हो गई है। अब तक विवाह निबंधन (मैरिज रजिस्ट्रेशन) के लिए निबंधन कार्यालय में 167 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। गौरतलब है कि सीमांचल और कोसी क्षेत्र की सीमाएं नेपाल से सटी हुई हैं। किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार और सुपौल जिलों में हजारों की संख्या में ऐसी महिलाएं रहती हैं, जिनका मायका नेपाल में है।

    नागरिकता के लिए गृह मंत्रालय के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य

    "मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए नेपाली मूल की महिलाओं के आवेदन प्रखंड कार्यालय स्तर पर जमा लिए जा रहे हैं। भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की एक निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया है, जिसके तहत भारत में कम से कम 7 वर्षों का सतत निवास अनिवार्य है। पात्र महिलाएं भारत सरकार के गृह मंत्रालय के आधिकारिक नागरिकता पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं।"

    — आशीष कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), ठाकुरगंज