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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 01, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Bihar Election: रिश्तेदारी के बहाने वोटरों को रिझाने की कोशिश, पकड़ में नहीं आ रहा मतदाता; टेंशन में उम्मीदवार

    Updated: Wed, 01 May 2024 01:21 PM (IST)

    Bihar Politicsबिहार में इस बार वोटरों का मिजाज पकड़ना मुश्किल हो रहा है। उम्मीदवार समझ नहीं पा रहे हैं कि वोटर किस तरफ जा रहे हैं। जदयू के नरेश पासवान ...और पढ़ें

    बिहार में इस बार बदल रहा वोटरों का मिजाज (जागरण)
    बिहार में इस बार बदल रहा वोटरों का मिजाज (जागरण)

    HighLights

    1. रिश्तेदारों के पहुंचने उनके प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने का दे रहे आश्वासन
    2. वोटरों को रिझाने में रिश्तेदारों को भी हो रही मशक्कत
    3. चुनाव प्रचार को लेकर पूर्व की उत्साह नहीं दिखा रहे लोग

    जागरण संवाददाता, मधेपुरा। Madhepura News:  लोकसभा चुनाव को लेकर प्रचार अभियान अब तेज हो चुका है। इस बार मतदाताओं की चुप्पी प्रत्याशी और उनके समर्थकों को परेशान कर रही है। ऐसे में मतदाताओं को रिझाने की कोशिश में प्रत्याशी और और उनके समर्थक जुट गए हैं।

    जदयू के नरेश पासवान, व्यवसायिक प्रकोष्ठ के अशोक चौधरी लगातार अपनी जाति व रिश्तेदारी में पक्ष में वोट डालने की बात कहकर घूम रहे हैं। वहीं परिवहन मंत्री शीला मंडल ने भी क्षेत्र में दो दिनों तक घूमकर प्रचार किया। इधर राजद से विनीता भारती भी पक्ष में करने के लिए लोगों के बीच जा रही है। इसके अलावा जयकांत यादव भी लगे हुए हैं।

    रिश्तेदारों के जरिए वोटरों के पास पहुंचने की कोशिश

    मालूम हो कि मधेपुरा लोकसभा में राजद और जदयू के प्रत्याशी के बीच मुकाबला है। ऐसे में दोनों प्रत्याशी और उनके समर्थक वोटरों को साधने के लिए रिश्तेदारों के बहाने उनके घर पहुंच कर अपने पक्ष में मतदान करने को लेकर रिझाने में जुट गए हैं। प्रचार अभियान के दौरान जाति का विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    जिस जाति के लोग वहां उस जाति के नेताओं को भेजा जा रहा

    जिस जाति के लोग जिस गांव में अधिक वहां उस जाति के नेताओं को भेजा जा रहा है। जनसंपर्क के दौरान नेताजी के कार्यकर्ता मतदाताओं को पूरी तरह से भरोसे में लेने की पूरी कोशिश करते हैं। लेकिन मतदाता भी इस नेताओं को आश्वासन देने में पीछे नहीं हट रहे हैं। हालांकि जनसंपर्क कर लौटने पर राजद और जदयू के कार्यकर्ता अपने प्रत्याशी को माहौल अपने पक्ष करने का पूरा आश्वासन देने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं।

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     रिश्तेदारों के समक्ष भी नहीं दिख रहे उत्साह

    इस बार के चुनाव में वोटरों ने चुप्पी की चादर ओढ़ ली है। जनसंपर्क के लिए जाने वाले नेताओं को भी यह समझ में नहीं आ रहा है कि इसकी वजह क्या है। एनडीए गठबंधन के नेता ने कहा कि मतदाताओं में कोई खास उत्साह नहीं दिख रहा है। वोट देने के नाम पर हामी तो भर रहें हैं।

    लेकिन प्रचार के लिए कोई दिलचस्पी भी नहीं दिखायी। उन्होंने बताया कि अपने रिश्तेदार के यहां जाकर गांव में महौल बनाने में मदद करने को कहा। लेकिन रिश्तेदारों ने कहा वोट देंगे लेकिन चुनाव प्रचार से हम लोगों को अलग रखिये। जबकि पूर्व के चुनावों में यह स्थिति नहीं थी। ऐसे में प्रचार में जाने वाले नेताजी भी सशंक्ति नजर आ रहे हैं।

     चुनाव के बाद क्षेत्र से कटना एक बड़ी वजह

    लोकसभा चुनाव के प्रचार प्रसार दौरान मधेपुरा में वोटरों में कोई उत्साह नहीं होने की मुख्य वजह पार्टी के कार्यकर्ता चुनाव जीतने के बाद सांसद विधायक का क्षेत्र से कटना मान रहे हैं। यहीं वजह है कि इस बार चुनाव में प्रचार में रिश्तेदारों का इस्तेमाल कर माहौल बनाने वाले राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को अभी तक मायूसी मिल रही है।

    मधेपुरा विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सधुआ के किसान विजय कुमार, रंजय कुमार, सुमन भगत सहित अन्य ने बताया कि वोट किसको देना यह पहले ही तय हो चुका है। अब अपना काम काज छोड़कर बेवजह ही नेताओं के पीछे जाने का जमाना बदल गया है। नेताओं के पीछे जाने से बेहतर अपने काम काज को बढ़ाने का समय है। उनलोगों ने बताया कि वोट देने जरूर जाएंगे।

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