Madhepura News: कोसी नदी दिखाने लगी रौद्र रूप, कई नए इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी
मधेपुरा के आलमनगर और चौसा प्रखंड में कोसी नदी का जलस्तर दो लाख क्यूसेक पार कर गया है, जिससे बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। कई नए इलाकों में पानी घुसने ...और पढ़ें

कोसी नदी दिखाने लगी रौद्र रूप, कई नए इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी
HighLights
कोसी नदी का जलस्तर 2 लाख क्यूसेक के पार पहुंचा।
आलमनगर और चौसा प्रखंड में बाढ़ की स्थिति गंभीर।
खेत-खलिहान जलमग्न, लोग सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर रहे।
संवाद सूत्र, उदाकिशुनगंज (मधेपुरा)। आलमनगर और चौसा प्रखंड क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति विकराल होती जा रही है। कोसी नदी अब रौद्र रूप दिखाने लगी हे। कोसी नदी की उफनती धारा के कारण कई नए इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है।
खेत खलिहान पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। कोसी और उसकी सहायक नदियां उफान पर है। लोग सुरक्षित स्थान को पलायन कर रहे हैं। पशुपालकों के लिए बड़ी चिंता बन गई है।
24 घंटे में 40 हजार क्यूसेक बढ़ा जलस्तर:
रविवार को कोसी नदी का जलस्तर दो लाख क्यूसेक को पार कर गया है। रविवार को मधेपुरा में कोसी नदी का डिस्चार्ज 2.09 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया।
जल निस्सरण प्रमंडल कोपरिया के कार्यपालक अभियंता सुमन कुमार ने बताया कि कोसी नदी में पानी का डिस्चार्ज बढ़ा है। बाढ़ का खतरा बढ़ चुका है। एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
कोसी नदी का बढ़ता जलस्तर चौसा प्रखंड के फुलौत और मोरसंडा पंचायत के नीचले इलाकों के लोगों के लिए एक बार फिर चिंता का कारण बन गया है। लगातार बढ़ रहे जलप्रवाह के कारण गांवों के आसपास पानी का फैलाव तेज हो गया है।
रविवार को स्थिति भयावह दिखी। लोगों में बाढ़ की आशंका और गहरा गई है। ग्रामीण अपने परिवार के साथ-साथ मवेशियों की सुरक्षा को लेकर भी परेशान हैं।
निचले इलाकों में पानी पहुंचने के साथ ही पशुपालकों ने मवेशियों के लिए सूखा चारा, भूसा और अन्य आवश्यक सामग्री जुटानी शुरू कर दी है।
कई परिवारों ने चूड़ा, गुड़, सत्तू, आटा, दाल, नमक, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान सुरक्षित कर ऊंचे स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। यदि पानी का स्तर और बढ़ता है तो लोगों को गांव छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कोसी के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से खेतों में लगी धान और अन्य फसलें भी खतरे में पड़ गई हैं। कई जगह खेतों में पानी प्रवेश कर चुका है, जबकि गांवों को जोड़ने वाली कच्ची सड़कें भी जलमग्न होने लगी हैं। लोगों को डर है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़क से कट सकता है।
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सबसे अधिक चिंता पशुपालकों को सता रही है। बाढ़ के दौरान मवेशियों के लिए चारा और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी कारण लोग पहले से ही तैयारी में जुट गए हैं। कई परिवार अपने मवेशियों को ऊंचे बांधों, विद्यालय परिसरों और अन्य सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की योजना बना रहे हैं।
कोसी के किनारे बसे गांवों में फिलहाल भय और आशंका का माहौल है। लोग हर पल नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की तैयारी की जा रही है। वहीं पशुपालक अपने मवेशियों को बचाने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं।
यदि आने वाले दिनों में कोसी में जलप्रवाह और बढ़ता है तो फुलौत, मोरसंडा तथा आसपास के कई निचले इलाकों में बाढ़ का संकट और गहरा सकता है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए पूरी सतर्कता बरतना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।
इधर, आलमनगर प्रखंड के रतवारा पंचायत के कपसिया, ललिया, छतौना बासा, भवानीपुर बासा, अठगामा बासा, हड़जोरा घाट, पुरानी मुरौत आदि गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। जिससे लोगों को मुश्किलें बढ़ गई है।
बाढ़ आपदा को लेकर एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग पूरी तरह अलर्ट है। स्थिति से निपटने की तैयारी है। रविवार को दो लाख नौ हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज रहा है। - सुमन कुमार, कार्यपालक अभियंता, जल निस्सरण प्रमंडल, कोपरिया