'एक पल की भी देरी होती तो' गर्भवती के शरीर में बचा था 2.9 ग्राम खून, स्वास्थ्य टीम की मुस्तैदी से बची दो जिंदगियां
Madhepura Sadar Hospital: मधेपुरा सदर अस्पताल में 2.9 ग्राम हीमोग्लोबिन वाली गर्भवती नेहा कुमारी को परिजनों द्वारा घर ले जाने ...और पढ़ें

Madhepura Sadar Hospital: मधेपुरा में 9 माह की गर्भवती में मिला मात्र 2.9 ग्राम हीमोग्लोबिन, घर भागे परिजनों को खोजकर लाई स्वास्थ्य विभाग की टीम; चढ़ाया जा रहा खून
HighLights
गर्भवती महिला का हीमोग्लोबिन स्तर 2.9 ग्राम था।
परिजनों द्वारा अस्पताल से घर ले जाने पर हड़कंप।
स्वास्थ्य टीम ने तत्परता से महिला की जान बचाई।
जागरण संवाददाता, मधेपुरा। Madhepura Sadar Hospital: जिले के सदर अस्पताल में लापरवाही और अंधविश्वास के बीच स्वास्थ्य महकमे की तत्परता से एक गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की जान पर मंडरा रहा बड़ा खतरा टल गया। मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत नवटोलिया परमानंदपुर निवासी सोमन यादव की 21 वर्षीय पुत्री नेहा कुमारी को गुरुवार को प्रसव पूर्व जांच व उपचार के लिए सदर अस्पताल लाया गया था।
नौ माह की पूर्ण गर्भवती नेहा की जब पैथोलॉजी जांच कराई गई, तो उसकी रिपोर्ट देखकर ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों के होश उड़ गए। महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा घटकर महज 2.9 ग्राम पाई गई, जो चिकित्सकीय दृष्टिकोण से जीवन और मौत के बीच का बेहद नाजुक और खतरनाक स्तर माना जाता है।
मुरलीगंज के नवटोलिया की 21 वर्षीय 9 माह की गर्भवती नेहा कुमारी में हीमोग्लोबिन घटकर पहुंचा बेहद नाजुक स्तर 2.9 ग्राम पर
चिकित्सकों द्वारा तत्काल ब्लड ट्रांसफ्यूजन की बात कहने पर घबराकर मरीज को घर लेकर चले गए थे परिजन
मामले की भनक लगते ही स्वास्थ्य महकमे में मचा हड़कंप, शुक्रवार सुबह घर से प्रसूता को वापस लाकर सदर अस्पताल में कराया भर्ती
ब्लड बैंक से 'O+' ग्रुप का रक्त उपलब्ध कराकर चढ़ाना शुरू, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही जच्चा-बच्चा की निगरानी
चिकित्सकों ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत मरीज को भर्ती कर 'ओ पॉजिटिव' रक्त चढ़ाने की सख्त सलाह दी। लेकिन, खून की अत्यधिक कमी की बात सुनते ही परिजन घबरा गए और किसी अनहोनी के डर या नासमझी में बिना डॉक्टरों को बताए चुपके से प्रसूता को लेकर अस्पताल से वापस अपने गांव लौट गए।
घर से वापस अस्पताल लाई स्वास्थ्य विभाग की टीम
जैसे ही स्वास्थ्य विभाग के वरीय पदाधिकारियों को इस बात की सूचना मिली कि 2.9 ग्राम हीमोग्लोबिन वाली 9 माह की गर्भवती महिला अस्पताल से घर चली गई है, पूरे विभाग में हड़कंप मच गया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसे अत्यंत गंभीर आपात स्थिति माना, क्योंकि किसी भी क्षण प्रसव पीड़ा शुरू हो सकती थी और शरीर में रक्त न होने के कारण प्रसूता व नवजात दोनों की जान जा सकती थी।
विभाग ने बिना एक पल गंवाए तत्काल खोजबीन शुरू की। विशेष स्वास्थ्य दल और एंबुलेंस को नवटोलिया गांव भेजा गया। परिजनों को समझा-बुझाकर शुक्रवार की सुबह करीब 11:30 बजे महिला को दोबारा सदर अस्पताल लाया गया। अस्पताल पहुंचते ही रेडक्रॉस ब्लड बैंक से फौरन 'ओ पॉजिटिव' रक्त की व्यवस्था की गई और डॉक्टरों की सीधी निगरानी में ब्लड ट्रांसफ्यूजन (रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया) शुरू किया गया।
कभी भी हो सकता है प्रसव, रक्तस्राव से था जान का जोखिम
उपचार में जुटे विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि महिला गर्भावस्था के नौवें महीने में है और प्रसव का समय बेहद नजदीक है। प्रसव के दौरान सामान्य तौर पर भी अत्यधिक रक्तस्राव होता है। ऐसे में यदि 2.9 ग्राम हीमोग्लोबिन के साथ डिलीवरी होती, तो कार्डियक अरेस्ट या अत्यधिक रक्तस्राव के चलते जच्चा और बच्चा दोनों का जीवन समाप्त हो सकता था।
चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि गर्भावस्था के दौरान हीमोग्लोबिन की नियमित जांच न कराना और आयरन-फोलिक एसिड की खुराक न लेना ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बड़ी समस्या बना हुआ है। फिलहाल महिला की स्थिति पर डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे पैनी नजर बनाए हुए है।
"स्वास्थ्य विभाग की पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता जच्चा-बच्चा दोनों को सुरक्षित बचाना है। समय पर रक्त चढ़ाने और चिकित्सकीय निगरानी से स्थिति को नियंत्रित किया जा रहा है। ऐसे अत्यंत गंभीर मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं। यह स्थिति गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच न कराने के कारण बनी। यदि पूर्व में नियमित प्रसव पूर्व जांच (ANC) हुई होती, तो इस गंभीर एनीमिया का पहले ही पता चल जाता और समय रहते उपचार हो पाता।"
— डॉ. फूल कुमार, प्रभारी सिविल सर्जन, मधेपुरा।
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